ख़ैरात की दुश्मनी – शशि कुमार आँसू

भई दुश्मन बनाने के लिए ज़रूरी नही की हर वक़्त लड़ा जाए,
ये काम आप थोड़े कामयाब होके  ख़ैरात में भी पा सकते हैं।

बदचलन होना लाजमी है – शशि कुमार आँसू

थोड़ा तो बदचलन होना लाजमी है मेरे यार
भस्मासुर बहुत हैं! बिन कहे लाज़ लूट लेते हैं।।

थोड़ा तो बदचलन होना लाजमी है मेरे यार
भस्मासुर बहुत हैं! बिन कहे लाज़ लूट लेते हैं।।
©शशि कुमार आँसू
#SKA


ज़रा फ़ासले से रहा करें – शशि कुमार आँसू

कोई हाथ भी अब न बढ़ाएगा बस कहिये ‘नमस्ते’ तपाक से
ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से रहा करें।।

नमस्ते सदा वत्सले

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥१॥

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गम्
स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्॥२॥

समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥३॥

Credit :Namaste Sada Vatsale Matribhume | RSS | Akshay Pandya | Sushant Trivedi

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे, पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥ १॥

हे प्यार करने वाली मातृभूमि! मैं तुझे सदा (सदैव) नमस्कार करता हूँ। तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता, इमे सादरं त्वाम नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं, शुभामाशिषम देहि तत्पूर्तये।

हे महामंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे ही कार्य में मेरा यह शरीर अर्पण हो। मैं तुझे बारम्बार नमस्कार करता हूँ।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम, सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्,
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं, स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्॥ २॥

हे सर्वशक्तिशाली परमेश्वर! हम हिन्दूराष्ट्र के अंगभूत तुझे आदरसहित प्रणाम करते हैं। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है। उसकी पूर्ति के लिए हमें अपना शुभाशीर्वाद दे।

समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं, परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा, हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

हे प्रभु! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके, ऐसा शुद्ध चारित्र्य दे जिसके समक्ष सम्पूर्ण विश्व नतमस्तक हो जाये, ऐसा ज्ञान दे कि स्वयं के द्वारा स्वीकृत किया गया यह कंटकाकीर्ण मार्ग सुगम हो जाये।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्, विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं, समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥ ३॥

॥ भारत माता की जय॥

उग्र वीरव्रती की भावना हम में उत्स्फूर्त होती रहे जो उच्चतम आध्यात्मिक सुख एवं महानतम ऐहिक समृद्धि प्राप्त करने का एकमेव श्रेष्ठतम साधन है। तीव्र एवं अखंड ध्येयनिष्ठा हमारे अंतःकरणों में सदैव जागती रहे।तेरी कृपा से हमारी यह विजयशालिनी संघठित कार्यशक्ति हमारे धर्म का सरंक्षण कर इस राष्ट्र को वैभव के उच्चतम शिखर पर पहुँचाने में समर्थ हो। भारत माता की जय ![1]

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना है। सम्पूर्ण प्रार्थना संस्कृत में है केवल इसकी अन्तिम पंक्ति (भारत माता की जय!) हिन्दी में है। इसे सर्वप्रथम २३ अप्रैल १९४० को पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में गाया गया था। यादव राव जोशी ने इसे सुर प्रदान किया था। संघ की शाखा या अन्य कार्यक्रमों में इस प्रार्थना को अनिवार्यतः गाया जाता है और ध्वज के सम्मुख नमन किया जाता है।

साभार – https://hi.wikipedia.org/wiki/नमस्तेसदावत्सले
http://rss.org/

बड़ों को इज़्ज़त दें Stay Concerned – Shashi Kumar Aansoo

आजकल जरुरी नहीं कि किसी की इज्जत पांव छूने से ही की जाए …
उन्हें देखकर अपना मोबाइल एक तरफ रख देना भी बहुत बड़ी इज्जत है..” ~ Ef vB ..


Today it is not essential to touch a persons feet to give respect ; putting your mobile away on seeing them is great respect also

द्राैपदी ! ख़ुद हीं अब गांडीव उठाओ

हे द्राैपदी !
ख़ुद हीं अब गांडीव उठाओ
गोविंद अब ना आएंगे…
छोड़ो मेहंदी खड्ग संभालो
दुःशासन से चीर बचा लो
गोविंद अब ना आएंगे…

#HyderabadHorror

ख्वाबों की खनक

ख्वाबों की खनक भी होती है गजब की!

नींद कुर्बान करके भी मुस्कुराता है आदमी !

ख्वाबों की खनक

HappyFriendshipDay2019

यकीं मानिए अद्भुत व अनमोल वही है जो निःशुल्क है! हवा, पानी, प्रकाश और आपकी #दोस्ती

HappyFriendshipDay2019

#HappyFriendshipDay2019

बौद्धपौर्णिमायाः शुभाशयाः

Source – BuddhaCharita by Aśvaghoṣa – 9.18

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जलेबियाँ उलझी रहें, तो बेहतर है!

सादगी जँचती नहीं, हर किसी पे यहाँ
जलेबियाँ उलझी रहें, तो बेहतर है!

Have A Wonderful Day Ahead…

Rgds,
Shashi Kumar
https://inspiringshashi.com

इश्क़ है..

हुस्न के क़सीदे तो गड़ती रहेगी, महफिले..! झुरिया भी प्यारी लगे, तो मान लेना इश्क है..!

मेरी पसंद लाजवाब है

यक़ीन मानिए मेरी पसंद लाजवाब है, आप अपनी ही मिसाल ले लीजिए!

मेरी पसंद लाजवाब है