#SaturdayVibes – Break The Chain

If you do what you’ve always done, You’ll get what you have always gotten

SO,

Break The Chain and Rise…

I look forward to continue serving your General Insurance needs

#StayInsured #ThinkAhead #Muzaffarpur #Motihari #Sitamarhi #Siwan #Chapra #Gopalganj #Bettiah #Madhubani #Darbhanga #Raxaul #Quote #Life #InspiringShashi #iShashi #SaturdayMorning

Tuesday Motivation – Stay Humble

Good Morning 🙏

उन्हें ठहरे समुंदर ने डुबोया
जिन्हें तूफ़ाँ का अंदाज़ा बहुत था
~मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

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We look forward to continue serving your General Insurance needs

Share Your Happiness : न जाने कल हो न हो!

Happiness is real when it’s shared with whom we are being cared…

शायद हम अटक कर रह जाते है हरदम दुसरो को गलत सिद्ध करने में समय व्यतित कर देते है और समय कब दगा दे जाता है पता नही चलता!!

चलो सबको माफ करो! खुशी के पल को जी भर के जियो! साथ होने का अहसास का आनंद लो। ख़ुद को टेक्नोलॉजी पर ज्यादा कंज़्यूम मत करो… अड़चनों से थोड़ा आगे बढ़ो!

न जाने कल हो न हो!

Fight In The Arena – Shashi Kumar Aansoo

You Must Not allow people to mistune your emotions & poison the day with their words. Some People find opportunity to dash You Therefore You need to have patience. Bring Stability, permanence (ठहराव) in your Karma. Don’t let impatience mind govern your decisions & actions. Impatience behavior gives nothing except pang of guilt. Keep yourself calm & ambitious enough to fight with all petty things.

When you are #ambitious you automatically busy & when you busy you automatically respectful for other person & profession . Critics are the least ambitious one who avoid failure doing nothing but criticizing others. Here the man only matters who fought in the arena.

Be the man of arena. keep rejuvenating yourself. Learn & Rise

#Respectful #सत्यवचन #ShashiKumarAansoo #BlogPost #Mytruth #monologue #MySpeak # Speaking Shashi #मेरी बात

एक परी दूर जगत की

आते जाते सुना था सबसे
एक परी वो दूर जगत से

बैठ के आयी एक किश्ती में
दूर जहां से एक बस्ती में

मिलेगी मुझसे कब वो डर है
थोड़ा दूर यहां से उसका घर है

चलो तो उसको ढूंढ़ कर लाएं
आरज़ू दिल की सब कह सुनाएं।।

नचिकेता की कहानी : दुनिया का पहला जिज्ञासु

कठ उपनिषद में नचिकेता को सबसे पहला साधक बताया गया है। नचिकेता मृत्यु का भेद जानने के लिए यम के द्वार तक पहुंच गया था। जानते हैं नचिकेता के प्रश्न और यम के उत्तर के बारे में

नचिकेता के पिता का यज्ञ
नचिकेता को दुनिया का पहला जिज्ञासु माना जाता है – कम से कम पहला महत्वपूर्ण जिज्ञासु। एक उपनिषद् भी उस से शुरू होता है। नचिकेता एक छोटा बालक था। उसके पिता ने एक यज्ञ करने की शपथ ली थी। यह एक ऐसा पवित्र अनुष्ठान था, जिसमें उन्हें अपनी सारी सांसारिक संपत्ति – अपना घर, अपना सारा सामान, यहां तक कि अपनी पत्नी, अपने बच्चे, यानी अपना सब कुछ ऋषियों, ब्राह्मणों और दूसरे लोगों को दान में दे देना था। इस तरह के यज्ञ से आप आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करते हैं। यह एक ऐसा साधन है, जिसे पारंपरिक रूप से रचा गया है।

नचिकेता के पिता ने बेकार की चीज़ें दान कर दीं
कुछ लोग आध्यात्मिक ज्ञान के लिए इस तरह का शपथ लेते हैं। नचिकेता के पिता ने यह शपथ ली और और उन्होंने अपनी सभी बीमार गायें, बेकार संपत्ति और जिन चीजों की उन्हें जरूरत नहीं थी, जो किसी न किसी रूप में उनके लिए बोझ थीं, वे सब दान में दे डालीं। उन्होंने खूब दिखावा किया मगर जिन चीजों की उन्हें वाकई जरूरत थी, जैसे अपनी दोनों पत्नियों और बच्चे को, उनको उन्होंने अपने पास ही रखा। नचिकेता को यह सब देखकर बहुत दुख हुआ। उसने देखा कि उसके पिता ने ईमानदारी नहीं दिखाई। उसके पिता ने शपथ ली थी कि वह सब कुछ दान करके आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करेंगे, मगर उन्होंने चालाकी की। नचिकेता अपने पिता के पास गया और इस बारे में उनसे बात करने लगा। उसकी उम्र उस समय सिर्फ पांच साल की थी, मगर उसमें असाधारण समझदारी थी।

नचिकेता ने अपने पिता को समझाना चाहा
नचिकेता ने अपने पिता से कहा, ‘आपने ठीक नहीं किया। अगर आप सब कुछ देना नहीं चाहते थे, तो आपको यह शपथ नहीं लेनी चाहिए थी। एक बार शपथ लेने के बाद, आपको सब कुछ दे देना चाहिए। मुझे बताइए कि आप मुझे किसको दान करने वाले हैं?’ उसके पिता क्रोधित हो गए और बोले, ‘मैं तुम्हें यम को देने वाला हूं।’ यम मृत्यु के देवता होते हैं। बालक ने अपने पिता की बात को बहुत गंभीरता से लिया और यम के पास जाने के लिए तैयार होने लगा। फिर वह यम के पास चला गया। यह मत सोचिए कि ‘वह कैसे गया होगा, शरीर के साथ या शरीर छोड़कर?’ मुद्दा यह नहीं है। बस वह यम के पास चला गया।

यम की प्रतीक्षा में नचिकेता ने बिताए तीन दिन
यम उस समय यमलोक में नहीं थे। वह घूमने गए हुए थे। उन्हें घर-घर जाना पड़ता है। तो वह घूमने गए हुए थे। नचिकेता पूरे तीन दिन तक इंतजार करता रहा। एक छोटा सा बालक भोजन-पानी के बिना यम के द्वार पर इंतजार करता रहा। तीन दिन बाद यम लौटे तो उन्होंने पूरी तरह थके और भूखे, मगर पक्के इरादे वाले इस छोटे से बालक को देखा। वह बिना हिले-डुले वहां बैठा हुआ था। वह भोजन की तलाश में इधर-उधर भी नहीं गया था। वह बस वहां बैठकर यम की प्रतीक्षा कर रहा था। यम इस बालक के पक्के इरादे से बहुत प्रभावित हुए, जो तीन दिन से प्रतीक्षा कर रहा था, वह भी बिना कुछ ग्रहण किए। वह बोले, ‘मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि तुम तीन दिन से मेरा इंतजार कर रहे हो। तुम्हें क्या चाहिए? मैं तुम्हें तीन वरदान देता हूं। बताओ, तुम क्या चाहते हो?’

नचिकेता ने पूछा मृत्यु के रहस्य के बारे में
नचिकेता ने सबसे पहले कहा, ‘मेरे पिता बहुत लालची हैं। वह सांसारिक सुख-सुविधाएं चाहते हैं। इसलिए आप उन्हें सारे भौतिक ऐशोआराम का आशीर्वाद दें। उन्हें राजा बना दीजिए।’ यम ने कहा ‘तथास्तु’। उसने दूसरा वरदान मांगा, ‘मैं जानना चाहता हूं कि मुझे ज्ञान प्राप्त करने के लिए किस तरह के कर्मों और यज्ञों को करने की जरूरत है।’ वैदिक साहित्य में हमेशा यज्ञों की बात की जाती है। सारा वैदिक साहित्य ऐसा ही है – यज्ञों के बारे में। यम ने उसे सिखाया कि उसे क्या करना चाहिए।
फिर नचिकेता ने उनसे पूछा, ‘मृत्यु का रहस्य क्या है? मृत्यु के बाद क्या होता है?’ यम ने कहा, ‘यह प्रश्न तुम वापस ले लो। तुम मुझसे और कुछ भी मांग लो। तुम चाहो तो मुझसे एक राज्य मांग लो, मैं तुम्हें दे दूंगा। मैं तुम्हें धन-दौलत दे सकता हूं। मैं तुम्हें दुनिया के सारे सुख दे सकता हूं।’ वह बोलते रहे, ‘तुम मुझे बताओ, क्या चाहते हो। तुम मुझसे दुनिया की सारी खुशियां ले लो, मगर यह प्रश्न मत पूछो।’ नचिकेता ने कहा, ‘इन सब का मैं क्या करूंगा? आप पहले ही मुझे बता चुके हैं कि ये सब चीजें नश्वर हैं। मैं पहले ही समझ चुका हूं कि सारे क्रियाकलाप, लोग जिन चीजों में सं लिप्त हैं, वे सब अर्थहीन हैं। वह सिर्फ दिखता है, वह हकीकत नहीं है। फिर मुझे और धन-दौलत देने का क्या लाभ? वह तो मेरे लिए सिर्फ एक जाल होगा। मैं कुछ नहीं चाहता, आप बस मेरे प्रश्न का उत्तर दीजिए।’

नचिकेता को हुई परम ज्ञान की प्राप्ति
यम ने इस सवाल को टालने की हर संभव कोशिश की। वह बोले, ‘देवता भी इस प्रश्न का उत्तर नहीं जानते। मैं तुम्हें नहीं बता सकता।’ नचिकेता ने कहा, ‘अगर ऐसा है, अगर देवता भी इसका उत्तर नहीं जानते और सिर्फ आप जानते हैं, तब तो आपको इसका उत्तर देना ही होगा।’
उसने अपनी जिद नहीं छोड़ी। यम एक बार फिर उसे वहीं छोड़कर महीनों के लिए घूमने चले गए। वह किसी तरह सिर्फ इस बालक से पीछा छुड़ाना चाहते थे। मगर बालक कई महीनों तक वहीं डटा रहा। कहा जाता है कि यम के द्वार पर ही उसे पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति हुई। उसे अस्तित्व के सारे प्रश्नों के जवाब मिल गए और उसने खुद को विलीन कर दिया। वह प्रथम जिज्ञासु था। इसलिए हमेशा उसे एक आदर्श की तरह प्रस्तुत किया जाता है। उस तरह का पक्का इरादा रखने वाला पांच साल का बालक, जो चॉकलेट या डिजनीलैंड की यात्रा जैसे लालच में नहीं पड़ा। वह सिर्फ ज्ञान चाहता था

ज्ञान पाने की प्रबल इच्छा का महत्व
इस तरह के व्यक्ति के लिए किसी तरह के मार्ग की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि मंजिल यहीं है, वेलंगिरि पहाड़ियों की चोटी पर नहीं है। जब मंजिल यहां नहीं होती, तब वह वेलंगिरि पहाड़ियों पर होती है और हमें धीरे-धीरे उन पर चढ़ना पड़ता है। जब आप नचिकेता की तरह होते हैं, तो आपको किसी मार्ग की जरूरत नहीं होती। सब कुछ यहीं मिल जाता है। कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। यहां हम जो कुछ कर रहे हैं, इसका पूरा मकसद उस तीव्रता को पैदा करना है। इच्छा को इतना प्रबल और शक्तिशाली होना चाहिए कि ईश्वर आपसे दूर न रह सके और दिव्यता आपको नजरअंदाज न कर पाए। ऐसा नहीं है कि दिव्यता आपको नजरअंदाज करने की कोशिश करता है, मगर आपका मन और अहं लाखों अलग-अलग तरीकों से वास्तविकता पर पर्दा डाल कर उसे आपकी आंखों से ओझल करने की कोशिश करते हैं।

आपकी तीव्रता ही आपको रूपांतरित करती है
चाहे आप कर्म के पथ पर चलें या ज्ञान, क्रिया या भक्ति के पथ पर, आपकी तीव्रता ही आपको इन रास्तों पर आपको आगे बढ़ाती है, न कि खुद ये रास्ते। अगर तीव्रता न हो, तो कोई क्रिया कुछ नहीं कर सकती। जब तीव्रता इन क्रियाओं में आ जाती है, तो उनमें आपको एक अलग आयाम तक ले जाने की शक्ति होती है।
यानी यह क्रिया नहीं है जो आपको रूपांतरित करती है, बल्कि आपकी तीव्रता आपको रूपांतरित करती है। जब आपमें ये तीव्रता होती है, तो क्रिया एक जबरदस्त सहारा है जो उस तीव्रता को और बढ़ता है। क्रियाओं का सारा मकसद यही है। चाहे आप किसी भी मार्ग पर भी चलें, पथ का अनुसरण आपको कोई ज्ञान प्राप्त नहीं करा सकता, जब तक कि आपके अंदर वह तीव्रता न हो।

सौ फीसदी या बिल्कुल नहीं
अगर आप आधे दिल से किसी से प्रेम करते हैं, तो वह प्रेम नहीं है। प्रेम या तो सौ फीसदी होता है या बिल्कुल नहीं। अगर आपको लगता है कि आप किसी से 99 फीसदी प्रेम कर सकते हैं, तो आपने प्रेम को जाना ही नहीं है। किसी भी तरह के क्रियाकलाप पर यही बात लागू होती है। अगर आप कोई कार्य सौ फीसदी नहीं करते, तो उसका कोई मतलब नहीं है। उसका कोई अच्छा नतीजा नहीं निकलेगा।। ज्यादा से ज्यादा वह आपका पेट भर सकता है। जब तक कि आप कोई काम सौ फीसदी न करें, वह आपको रूपांतरित नहीं कर सकता। जब तक कि आपका प्रेम सौ फीसदी न हो, वह आपको रूपांतरित नहीं कर सकता। वह लेन-देन की तरह कुछ पाने का एक जरिया हो सकता है, मगर अस्तित्व के अर्थों में उसका कोई मूल्य नहीं है।

सद्‌गुरु जग्गी वासुदेव

साभार : https://hindi.speakingtree.in/

बड़ों को इज़्ज़त दें Stay Concerned – Shashi Kumar Aansoo

आजकल जरुरी नहीं कि किसी की इज्जत पांव छूने से ही की जाए …
उन्हें देखकर अपना मोबाइल एक तरफ रख देना भी बहुत बड़ी इज्जत है..” ~ Ef vB ..


Today it is not essential to touch a persons feet to give respect ; putting your mobile away on seeing them is great respect also

Ability to Envision

“सारी शक्ति आप जो बनना चाहते हैं, उसकी कल्पना करने की क्षमता से आती है।” – पीरो कैरोल

बेकार में भक्ति क्यों?

कश्मीर में मात्र पचीस हजार अतिरिक्त फोर्स भेजी गई है । यह बहुत कम है । पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सिद्धू के परम प्रिय मित्र ने जब खुले आम स्वीकार कर लिया है कि आतंकिस्तान में चालीस हजार प्रशिक्षित आत्मघाती आतंकवादी भारत की सीमा में सेंध लगाने की ताक में छुट्टा घूम रहे हैं ( जबकि मेरा मानना है कि इमरान खान ने निश्चित रूप से यह संख्या कम बताई होगी ) तो यह मान लेना चाहिए की लगभग चार लाख पाक आतंकी भारतीय सीमा में घुसपैठ की ताक में हैं । दूसरी ओर अफगानिस्तान, सीरिया, फिलिस्तीन इत्यादि जगहों से लतिया कर भगाए गए ISI, अलकायदा, तालिबान और पाकिस्तान की विभिन्न जमातें, दाउद इब्राहिम ग्रूप, कश्मीर के सेपरेटिस्ट, कश्मीरी पत्थरबाज, भारत की हार पर खुशी मनाने वाले नवयुवक, कई राजनीतिक दलों में विदेशी मूल के और वर्णशंकर नेता और उनके समर्थक, चीन और खाड़ी देशों के चंदे पर मौज उड़ाने वाले बौद्धिक आतंकी, अर्बन नक्सली, JNU और AMU जैसे विश्वविद्यालयों के अपनी थाली में खाकर उसी में छेद करने वाले कुछ जाने-माने गद्दार, खुद को छद्मधर्मनिरपेक्ष बताकर बुद्धिजीवी कहलाने का शौक रखने वाले बकलोलों को मिलाकर भारत के अतिसक्रिय दुश्मनों की कुल संख्या लगभग एक करोड़ हो जाती है । इस हिसाब से अभी कश्मीर में कम-से-कम चार से पाँच लाख और सुरक्षाबलों की जरूरत है । देश के विभिन्न भागों में अवस्थित छावनियों में इंतजार कर रहे पारामिलिट्री और सेना के जवानों को अपना जौहर दिखाने का मौका मिलना ही चाहिए । अगर सुरक्षाबलों की कमी महसूस हो तो सभी राज्यों के दस प्रतिशत सुरक्षाबलों की प्रतिनियुक्ति कश्मीर में हो । सेना और अर्धसैनिक बलों की बहाली में तेजी लानी चाहिए । अगर पैसे की कमी महसूस हो रही हो तो मनरेगा और मध्याह्न भोजन योजना जैसी योजनाओं को बंद कर और दो प्रतिशत अतिरिक्त सुरक्षा कर लगाकर सैनिक साजो-सामान की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए । जब कश्मीर में प्रयाप्त मात्रा में सुरक्षा बल और साजोसामान उपलब्ध हो जांय तो एक बार तो बंदूक वाले, पत्थर वाले और विचार वाले आतंकियों की जमकर रगड़ाई होनी ही चाहिए ।

अगर कुछ नहीं हुआ तो भक्त की उपाधि धारण करना बेकार ही है ।

#OperationAllOut

Written By Chandan Kumar

Teacher @ Lakhisarai

Learnings from Chanakya Neeti – Stay With Perishable First

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥

01-13

Hindi Translation
जो निश्चित को छोड़कर अनिश्चित का सहारा लेता है, उसका निश्चित भी नष्ट हो जाता है। अनिश्चित तो स्वयं नष्ट होता ही है।

महान चाणक्य नीति के अपने पहले ही अध्याय के तेरहवें श्लोक में बताया गया है कि हम इंसान हर हाथ आई चीज को अपनी ही गलती से गंवा देते हैं। ऐसे मूर्ख सिर्फ प्लानिंग करते रहते हैं और जो चीज उनकी पहुंच में है उसे प्राप्त नहीं करते हुए उन चीजों के पीछे भागते हैं जो कभी उनकी हुई नहीं।

ऐसे लोग हर काम में लापरवाही करते हैं। अपने लक्ष्य विहीन मार्ग पर यूं ही विचरण करते पाए जाते हैं।

आवश्यक यह है कि आप पहले जो आप कर सकते है उसे कटिबद्धता पूर्वक संपन्न करें और एक सुनिश्चित योजना के निहित ही ख़ुद को ड्राइव करें।

English translation:

He who gives up what is imperishable for that which is perishable, Loses that which is imperishable; and doubtlessly loses that which is perishable also.

Learnings from Chanakya Neeti – The Right Time : 4.18

कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ ।
कश्चाहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥

Consider again and again the following: the right time, the right friends, the right place,
the right means of income, the right ways of spending, and from whom you derive your power.

इन बातो को बार बार गौर करे…सही समय, सही मित्र, सही ठिकाना, पैसे कमाने के सही साधन, पैसे खर्चा करने के सही तरीके, आपके उर्जा स्रोत ।

Source: Chanakya Neeti 4.18

करने से होता है – My Podcast

करने से होता है…If you have an instinct to act on a GOAL or an IDEA, immediately START within 5 Seconds else your Idiot Brain will Kill everything.

#inspiringshashi #Goal # idea # 5Seconds #Brain # Instinct #motivation #inspiring #thursday #करनेसेहोता_है

Eat That Frog : Six “P” formula

You may have heard of the six “P” formula. It says,

“Proper Prior Planning Prevents Poor Performance.”

I have found a simple truth. The ability to concentrate single-mindedly on your most important task, to do it well and to finish it completely, is the key to great success, achievement, respect, status and happiness in life.

(Moon+ Reader Pro v2.3.2, Eat That Frog)

Posted from WordPress for Android By Shashi Kumar Aansoo