Know All About #PayAsYouDrive Insurance By Shashi Kumar Aansoo

The usage-based motor insurance, popularly known as ‘Pay As You Drive’, allows customers to pay the premium depending on how many kilometers the car has traveled. In the first tranche of sanctions, the Insurance Regulatory and Development Authority of India (Irdai) approved companies such as Bharti Axa General, Go Digit, TATA AIG, ICICI Lombard, etc.

Under this insurance scheme, a customer pre-declares vehicle usage for a period of one year. Accordingly, the insurance premium will be calculated dynamically as per the pre-declared distance in km. The customer can choose from three slabs – 2500 km., 5000 km. and 7500 km – as per his/her usage need.

Where to buy?

Insurers are now offering the usage-based product through their company websites, online insurance aggregators like PolicyBazaar.com, agents and other distribution channels.

If you want to buy the policy online, then you just have to provide the odometer reading, Know Your Customer (KYC) details, and fill up a customer consumer consent form.

Should you buy?

‘Pay As You Drive’ is ideal for the customers who have multiple vehicles and may not use each vehicle as much; therefore, they may not have to pay a large premium amount.

Also, If you are someone who mostly relies on public transport or even use your vehicles rarely due to medical complications, then this will help you cut cost on your vehicle insurance.

Also, another thing to consider is that a “Pay As You Drive” product is comprehensive own damage (OD) plus third party (TP) policy and is being offered on a pilot basis for a year. Insurers are required to sell 10,000 policies in six months to be able to offer this as a regular insurance policy.

आपके पास एक से ज्यादा गाड़ियां हैं या अपनी कार के इस्तेमाल की बजाए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना बेहतर समझते हैं, ऐसे में आपको अपनी कार की इन्श्योरेन्स प्रीमियम पर ज्यादा नहीं खर्च करना पड़ेगा। आप #PayAsYouDrive जैसे पॉलिसी ले सकते हैं @shashiaansoo

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Disclaimer – Opinions expressed are solely my own or drawn from innumerable centers of lore. It do not express the views or opinions of my employer.

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो – निदा फ़ाज़ली

सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो

इधर उधर कई मंज़िल हैं चल सको तो चलो
बने बनाये हैं साँचे जो ढल सको तो चलो

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिराके अगर तुम सम्भल सको तो चलो

यही है ज़िन्दगी कुछ ख़्वाब चन्द उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो

हर इक सफ़र को है महफ़ूस रास्तों की तलाश
हिफ़ाज़तों की रिवायत बदल सको तो चलो

कहीं नहीं कोई सूरज, धुआँ धुआँ है फ़िज़ा
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो

@ निदा फ़ाज़ली

सतपुड़ा के घने जंगल – भवानीप्रसाद मिश्र

सतपुड़ा के घने जंगल।
नींद मे डूबे हुए से
ऊँघते अनमने जंगल।

झाड ऊँचे और नीचे,
चुप खड़े हैं आँख मीचे,
घास चुप है, कास चुप है
मूक शाल, पलाश चुप है।
बन सके तो धँसो इनमें,
धँस न पाती हवा जिनमें,
सतपुड़ा के घने जंगल
ऊँघते अनमने जंगल।

सड़े पत्ते, गले पत्ते,
हरे पत्ते, जले पत्ते,
वन्य पथ को ढँक रहे-से
पंक-दल मे पले पत्ते।
चलो इन पर चल सको तो,
दलो इनको दल सको तो,

ये घिनौने, घने जंगल
नींद में डूबे हुए से
ऊँघते अनमने जंगल।

अटपटी-उलझी लताएँ,
डालियों को खींच खाएँ,
पैर को पकड़ें अचानक,
प्राण को कस लें कपाएँ।
साँप सी काली लताएँ
बला की पाली लताएँ

लताओं के बने जंगल
नींद मे डूबे हुए से
ऊँघते अनमने जंगल।

मकड़ियों के जाल मुँह पर,
और सर के बाल मुँह पर
मच्छरों के दंश वाले,
दाग काले-लाल मुँह पर,
वात-झन्झा वहन करते,
चलो इतना सहन करते,

कष्ट से ये सने जंगल,
नींद मे डूबे हुए से
ऊँघते अनमने जंगल।

अजगरों से भरे जंगल।
अगम, गति से परे जंगल
सात-सात पहाड़ वाले,
बड़े छोटे झाड़ वाले,
शेर वाले बाघ वाले,
गरज और दहाड़ वाले,

कम्प से कनकने जंगल,
नींद मे डूबे हुए से
ऊँघते अनमने जंगल।

इन वनों के खूब भीतर,
चार मुर्गे, चार तीतर
पाल कर निश्चिन्त बैठे,
विजनवन के बीच बैठे,
झोंपडी पर फूस डाले
गोंड तगड़े और काले।

जब कि होली पास आती,
सरसराती घास गाती,
और महुए से लपकती,
मत्त करती बास आती,
गूँज उठते ढोल इनके,
गीत इनके, बोल इनके

सतपुड़ा के घने जंगल
नींद मे डूबे हुए से
उँघते अनमने जंगल।

जागते अँगड़ाइयों में,
खोह-खड्डों खाइयों में,
घास पागल, कास पागल,
शाल और पलाश पागल,
लता पागल, वात पागल,
डाल पागल, पात पागल
मत्त मुर्गे और तीतर,
इन वनों के खूब भीतर।

क्षितिज तक फ़ैला हुआ-सा,
मृत्यु तक मैला हुआ-सा,
क्षुब्ध, काली लहर वाला
मथित, उत्थित जहर वाला,
मेरु वाला, शेष वाला
शम्भु और सुरेश वाला
एक सागर जानते हो,
उसे कैसा मानते हो?

ठीक वैसे घने जंगल,
नींद मे डूबे हुए से
ऊँघते अनमने जंगल।

धँसो इनमें डर नहीं है,
मौत का यह घर नहीं है,
उतर कर बहते अनेकों,
कल-कथा कहते अनेकों,
नदी, निर्झर और नाले,
इन वनों ने गोद पाले।

लाख पंछी सौ हिरन-दल,
चाँद के कितने किरण दल,
झूमते बन-फूल, फलियाँ,
खिल रहीं अज्ञात कलियाँ,
हरित दूर्वा, रक्त किसलय,
पूत, पावन, पूर्ण रसमय

सतपुड़ा के घने जंगल,
लताओं के बने जंगल।

Disclaimer : ये कविता भारतीय काव्य की सार्वभौमिकता को संकलित करने के उद्देश्य से विशुद्ध अव्यावसायिक रूप मे यहाँ प्रस्तुत किया गया है।

नमस्ते सदा वत्सले

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥१॥

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्
सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्णमार्गम्
स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्॥२॥

समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥३॥

Credit :Namaste Sada Vatsale Matribhume | RSS | Akshay Pandya | Sushant Trivedi

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामङ्गले पुण्यभूमे त्वदर्थे, पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥ १॥

हे प्यार करने वाली मातृभूमि! मैं तुझे सदा (सदैव) नमस्कार करता हूँ। तूने मेरा सुख से पालन-पोषण किया है।

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्राङ्गभूता, इमे सादरं त्वाम नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बध्दा कटीयं, शुभामाशिषम देहि तत्पूर्तये।

हे महामंगलमयी पुण्यभूमि! तेरे ही कार्य में मेरा यह शरीर अर्पण हो। मैं तुझे बारम्बार नमस्कार करता हूँ।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम, सुशीलं जगद्येन नम्रं भवेत्,
श्रुतं चैव यत्कण्टकाकीर्ण मार्गं, स्वयं स्वीकृतं नः सुगं कारयेत्॥ २॥

हे सर्वशक्तिशाली परमेश्वर! हम हिन्दूराष्ट्र के अंगभूत तुझे आदरसहित प्रणाम करते हैं। तेरे ही कार्य के लिए हमने अपनी कमर कसी है। उसकी पूर्ति के लिए हमें अपना शुभाशीर्वाद दे।

समुत्कर्षनिःश्रेयसस्यैकमुग्रं, परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा, हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

हे प्रभु! हमें ऐसी शक्ति दे, जिसे विश्व में कभी कोई चुनौती न दे सके, ऐसा शुद्ध चारित्र्य दे जिसके समक्ष सम्पूर्ण विश्व नतमस्तक हो जाये, ऐसा ज्ञान दे कि स्वयं के द्वारा स्वीकृत किया गया यह कंटकाकीर्ण मार्ग सुगम हो जाये।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्, विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्।
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रं, समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥ ३॥

॥ भारत माता की जय॥

उग्र वीरव्रती की भावना हम में उत्स्फूर्त होती रहे जो उच्चतम आध्यात्मिक सुख एवं महानतम ऐहिक समृद्धि प्राप्त करने का एकमेव श्रेष्ठतम साधन है। तीव्र एवं अखंड ध्येयनिष्ठा हमारे अंतःकरणों में सदैव जागती रहे।तेरी कृपा से हमारी यह विजयशालिनी संघठित कार्यशक्ति हमारे धर्म का सरंक्षण कर इस राष्ट्र को वैभव के उच्चतम शिखर पर पहुँचाने में समर्थ हो। भारत माता की जय ![1]

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना है। सम्पूर्ण प्रार्थना संस्कृत में है केवल इसकी अन्तिम पंक्ति (भारत माता की जय!) हिन्दी में है। इसे सर्वप्रथम २३ अप्रैल १९४० को पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में गाया गया था। यादव राव जोशी ने इसे सुर प्रदान किया था। संघ की शाखा या अन्य कार्यक्रमों में इस प्रार्थना को अनिवार्यतः गाया जाता है और ध्वज के सम्मुख नमन किया जाता है।

साभार – https://hi.wikipedia.org/wiki/नमस्तेसदावत्सले
http://rss.org/

मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग – फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग
मैं ने समझा था कि तू है तो दरख़्शाँ है हयात
तेरा ग़म है तो ग़म-ए-दहर का झगड़ा क्या है
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात
तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है

तू जो मिल जाए तो तक़दीर निगूँ हो जाए
यूँ न था मैं ने फ़क़त चाहा था यूँ हो जाए
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

अन-गिनत सदियों के तारीक बहीमाना तिलिस्म
रेशम ओ अतलस ओ कमख़ाब में बुनवाए हुए
जा-ब-जा बिकते हुए कूचा-ओ-बाज़ार में जिस्म
ख़ाक में लुथड़े हुए ख़ून में नहलाए हुए

जिस्म निकले हुए अमराज़ के तन्नूरों से
पीप बहती हुई गलते हुए नासूरों से
लौट जाती है उधर को भी नज़र क्या कीजे
अब भी दिलकश है तिरा हुस्न मगर क्या कीजे

और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग

पुस्तक : Nuskha Hai Wafa (पृष्ठ 61)undefined


Disclaimer : ये नज़्म भारतीय काव्य की सार्वभौमिकता को एक जगह संकलित करने के उद्देश्य से विशुद्ध अव्यावसायिक रूप मे यहाँ प्रस्तुत किया गया है

हेल्थ इंश्योरेंस अब जरूरी क्यों है? – All about health insurance

हम जानते हैं की इंडिया मे हेल्थ इनश्योरेंस कोई जबरदस्त एक्साटिंग शानदार खरीदने की चीज नहीं है। कोई भी इसे अपने टॉप विशलिस्ट मे नहीं रखता। जब भी हेल्थ इनश्योरेंस खरीदने की बात होती है सब नायाब इनोवेटिव बहाने ढूंढ लेते हैं… मसलन “बाद में कर लेंगे अभी तो जवान हैं”, “देख लेंगे अभी दूसरा काम है” , “अभी थोड़ा हाथ टाइट है नेक्स्ट टाइम करेंगे ”. यहाँ सब अपने ही एक्सक्यूज से लड़ते रहते हैं.

मैं आपसे बस एक बात कहूँगा “हाँ ये सच है कि हेल्थ इन्सुरंस या कोई भी इन्श्योरेन्स जब आप खरीदते है तो वो कोई खाश खुशी नहीं देती क्योंकि ये कोई भोग विलाश की वस्तु नहीं होती है पर याद रहे संकटकाल में इनश्योरेंस की अनुपस्थिति आपकी सारी खुशियों को बर्बाद कर सकती है।

तो चलिए आज मैं कुछ और इम्पॉर्टन्ट कारण बताता हूँ जिससे शायद आपको हेल्थ इन्श्योरेन्स की प्रासंगिकता समझने में मदद मिल पायें….

1. सबसे पहले कि हम कोई फैंटम नहीं हैं…

यहाँ कोई फैंटम नहीं हैं – Shashi Kumar Aansoo

हम सब जानते हैं कि आज कोई सुरक्षित नहीं है। कोई भी बीमार हो सकता है, किसी को कहीं भी संक्रमण अपनी चपेट मे ले सकता है। एक्सीडेंट की तो पूछिए मत!

सो ये बात तो क्लेयर है की हम कोई फैंटम ना हीं सुपर मैन हैं ना सुपर वुमन ये गलतफहमी से दूर रहें कि “हमे कुछ नहीं होगा” आज की परिस्थिति हमारा सुपर सेंस तो यही कहता कि जल्द हेल्थ इन्श्योरेन्स कवर ले लें ताकि कम प्रीमियम पड़े।

अगर आप 40 साल की उम्र से पहले ये हेल्थ इनश्योरेंस कवर लेते हैं तो आपको बिना शर्त के मैक्सिमम फायदा मिल सकता है।

2. कोरोना जैसे वायरस का अकस्मिक आघात

अगर कोरोना जैसे खतरनाक परिवार का विषाणु अगर बेलगाम हो जाये तो हम परिणाम देख रहें हैं…

फिलहाल आप कोविड-19 की से तो परिचित हो चुके हैं। ऐसे बहुत सारे दुर्दांत वायरस जो हमारी देह की दहलीज लांघ कर हमे रोग ग्रसित करना चाहता है, बस एक असावधानी ही काफी है। 

वैसे दुनिया पहले से H2N2, एशियन फ्लू, रैबीज, इबोला, HIV, Smallpox,रोटा वायरस, सार्स, मर्स और न जाने कितने वायरस की भयावहता झेल रही है ।

ऐसे काल मे एक सम्पूर्ण हेल्थ इनश्योरेंस की सख्त जरुरत है जिससे हम बेफिक्र होकर बेस्ट मेडिकल सुविधा ले सकें बिना खर्चों की चिंता कीये।  

3. फ्री हेल्थ चेक-उप की सुविधा

हेल्थ चेक उप हमे अगाह करते रहता है

हर कोई युवराज सिंह जैसा लकी नहीं होता।  उनकी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का पता शुरुआती दिनों में सिर्फ इसलिए लग पाया था क्योंकि उसकी नियमित हेल्थ चेक उप होती थी। वह एक खिलाड़ी था।  

हमारे यहाँ तो जब तक कि कोई बड़ी विपदा न आ जाए हम हम अपना हेल्थ चेक-उप टालते रहते हैं। फैन्टम जो ठहरे! हम यहाँ भी जुगाड़ कर लेते हैं ये जानते हुए कि रेगुलर हेल्थ चेक-उप हमें दुर्दांत रोगों की आहट पहले दे देती है पर हम इगनोर करते रहते है। 

हेल्थ इनश्योरेंस आपको फ्री हेल्थ चेक-उप की सुविधा देती है ताकि आप प्रीपेयर्ड रहें।

4 अव्यवस्थित 24/7 की जीवन-शैली

आज हम अपने आप को 24/7 वाले जनरेशन कहलाने में गौरवान्वित महसुस करते है पर ताज़ा सर्वेक्षण साफ-साफ इंगित करता है कि ये भागमभाग की जिंदगी हमें धीमे-धीमे बीमार और बीमार कर रही है। फिजिकल एक्टिविटी हमारी प्राइऑरटी में नीचे जा रही है।  

खान-पान की तो अलग दुविधा है। मिडल क्लास मे तो चाइनीज, कॉन्टिनेंटल और इटैलियन फूड खाना स्टैटस सिंबल बनता जा रहा है।

इंस्टाग्राम पर पोस्ट जो करना हैं #हैविंग_इटैलियन_फूड पेट अपना दुखड़ा भी नहीं कह पा रहा दिन ब दिन हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ती जा रही हैं। नए नए रोग पनप रहे हैं।  आए दिन हमे अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

ये सब आकस्मिक खर्चे का जंजाल है, इसके लिए जरूरी है कि हमारे पास स्वास्थ्य बीमा हो जो बुरे वक्त मे काम आ सके।   

5. आस-पास का बढ़ता प्रदूषण

WHO के हाल के रिपोर्ट के अनुसार वायु प्रदूषण हमारे फेफड़े, हृदय और हमारे सारे नाज़ुक अंगों पर अपना खतरनाक कुप्रभाव डाल रही है। जाने अनजाने कितने तरह के प्रदूषण के संपर्क मे हम आते रहते हैं।

भारत मे हर साल 18 लाख लोगों की मौत का जिम्मेदार ये वायु प्रदूषण है। विशेषज्ञ तो यहाँ तक मानते हैं की दिल्ली मे अकेले 30 हजार प्रीमेच्योर मौतों के लिए ये प्रदूषण हीं जिम्मेदार हैं। आकड़े पुराने है पर डरावने हैं।

हम दिन व दिन नये रोगों के प्रति इक्स्पोज़ होते जा रहें हैं ऐसे में प्रीपेयर्ड रहना हमारी मज़बूरी और जरूरत दोनो बन गई है।

6. हृदय व कैंसर रोगियों की बढ़ती तदात

आंकड़ों की मानें तो पिछले 25 बरस में हृदय रोगियों की तादाद में 50 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. एक स्टडी के अनुसार 75 वर्ष की उम्र से पहले कैंसर से मौत का जोखिम (मोर्टेलिटी रेट) पुरुषों में 7.34 फ़ीसदी और महिलाओं में 6.28 फ़ीसदी तक होता है। आज भारत में होने वाली 61% मौतों के लिए असंक्रामक बीमारियाँ (NCD – Non-Communicable Disease), जैसे कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोग जिम्मेवार है।

लोगों की निष्क्रिय जीवनशैली और खानपान की खराब आदतों के चलते हृदय रोग से पीड़ित लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। कुछ वर्ष पहले तक, 50 से 60 वर्ष के बीच की उम्र वाले लोगों के लिए हृदय रोग चिंता का विषय हुआ करता था, लेकिन अभी 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग वाले लोगों में भी यह दिखना शुरू होने लगा है।

भारत में निजी अस्पतालों में सामान्य हृदय रोग के उपचार पर 1,50,000 रुपए से 6,00,000 रुपए का खर्च आता है और दवाइयों पर आने वाला मासिक खर्च अलग है।

हृदय रोग के बढ़ते खतरों के मद्देनजर कार्डियक प्लान वाली बीमा पॉलिसी है जरूरी हो गई है।

7. फाइनेंशियल ब्रेक डाउन से सुरक्षा

याद रहे हॉस्पिटल किसी तरह का मोल भाव या नेगोशिएशन नहीं करती है। जिस तरह से हेल्थ सर्विस में सुधार आ रहा है सुविधाएं भी बहुत महंगी होती जा रही है। हम सबने अपने आसपास खेत-जेवर बिकते देखे हैं। ख़ुशहाल परिवार को  अचानक आये मेडिकल विपदाओं के कारण पैसे के लिए बिलखते देखे हैं।
हेल्थ इन्सुरंस उन्ही अप्रत्याशित खर्चों का ख्याल रखती है जो अचानक अस्पताल में भर्ती होने से उत्पन्न होता है। फाइनेंसियल एक्सपर्ट की एक हीं सलाह होती है की आप आपने सालाना आय का 2% हेल्थ इनश्योरेंस के लिए व्यय करें।  

इंश्योरेंस कंपनियों का हर बड़े-छोटे हॉस्पिटलों से टाई-अप होता है, अगर आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है तो आप अपना उपचार कहीं भी करा सकते है वो भी कैशलेस सुविधा के साथ। आपको इलाज के लिए पैसों की चिंता करने की जरूरत नहीं होती। आपके हॉस्पिटल बिल के लिए नेगोशिएशन करने की जरूरत नहीं होती ये काम आपकी इन्श्योरेन्स कंपनी करती है.  आप बेफिक्र होकर अपना इलाज करा सकते हैं।


हेल्थ इंश्योरेंस में मरीज को हॉस्पिटल लाने ले जाने में एंबुलेंस का जो  खर्च भी कवर होता है। 

हाँ इन सब के साथ हेल्थ इनश्योरेंस के लिए जो प्रीमियम का भुगतान किया जाता है, उस पर आयकर भुगतान अधिनियम की धारा 80डी के तहत टैक्स में छूट मिलती है।

त्रुटियों के लिए अग्रीम माफी –
इसमें बहुत सारी त्रुटियां हो सकती है पर मैंने अपनी कपैसिटी मे ईमानदार कोशिश की है और आशा करता हूं कि आप अपने कमेंट से मुझे और सुझाव देंगे। आप से आग्रह है की इसे समझे और इस बात से अपने आसपास के लोगों को अवेयर करें। मेरी यह कोशिश है कि समाज में इनश्योरेंस के बारे में अवरेनेस बढ़े इसलिए मैं बोलचाल की भाषा उपयोग करता हूँ . मैं कोई लल्लनटॉप नहीं हूँ और न इनश्योरेंस का ज्ञाता। बस जितना जानता हूँ वो आप तक बढ़ा दिया। अच्छा लगे तो आप दुसरो को बढ़ा दे बस यही मेरी चाहत है. मैं चाहता हूँ की इस लॉक डाउन में हम और स्टीरिओ टाइप के ज्ञान से थोड़े आगे बढ़े कुछ नया सीखे कुछ नया जाने

धन्यवाद।

#Disclaimer – Opinions expressed are solely my own or drawn from innumerable centers of culture & lore. It do not express the views or opinions of my employer.

वो नही मिला तो मलाल क्या जो गुज़र गया सो गुज़र गया – बशीर बद्र

मैंने कुछ ज्यादा पढ़ा नहीं और ज्यादा सुना भी नहीं पर जब जब सुना मैं मंत्रमुग्ध सा होता रहा। मैं शायद हीं किसी शायर को जान पाया और अब दिली ख्वाहिश है की उन सबों को पढ़ूँ और जहां जहां रत्न पड़े है उसे आत्मसात करता रहूँ ।

ये गज़ल बशीर बद्र ने लिखी है और मुझे बेहद पसंद है जो नहीं मिला उसका मलाल क्या जो गुज़र गया वो गुज़र गया. किस्सा बहुत है ज़िन्दगी की चलो पढ़ते हैं और आगे बढ़ते हैं.

आज कल सारा जहाँ लॉक डाउन के वज़ह से सब घर में जकरे पड़े हैं तो चलिए कुछ गोया ग़ज़ल वाजी भी हो जाये जो पसंद है उसे अंकित किये जाएँ.

वो नही मिला तो मलाल क्या, जो गुज़र गया सो गुज़र गया
उसे याद करके ना दिल दुखा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

ना गिला किया ना ख़फ़ा हुए, युँ ही रास्ते में जुदा हुए
ना तू बेवफ़ा ना मैं बेवफ़ा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

तुझे एतबार-ओ-यकीं नहीं, नहीं दुनिया इतनी बुरी नहीं
ना मलाल कर, मेरे साथ आ, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

वो वफ़ाएँ थीं, के जफ़ाएँ थीं, ये ना सोच किस की ख़ताएँ थीं
वो तेरा हैं, उसको गले लगा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

वो ग़ज़ल की कोई किताब था , वो गुलों में एक गुलाब था
ज़रा देर का कोई ख़्वाब था, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

मुझे पतझड़ों की कहानियाँ, न सुना सुना के उदास कर
तू खिज़ाँ का फूल है, मुस्कुरा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

वो उदास धूप समेट कर कहीं वादियों में उतर चुका
उसे अब न दे मिरे दिल सदा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

ये सफ़र भी किताना तवील है , यहाँ वक़्त कितना क़लील है
कहाँ लौट कर कोई आएगा, जो गुज़र गया सो गुज़र गया

कोई फ़र्क शाह-ओ-गदा नहीं, कि यहाँ किसी को बक़ा नहीं
ये उजाड़ महलों की सुन सदा , जो गुज़र गया सो गुज़र गया

IRDAI To Keep Third Party Motor Insurance Premiums Unchanged For All Vehicles In FY’21

Highlights

  • IRDAI will not increase the premium rates of third party motor insurance.
  • The increase in premium rates would have had multiplier effect.
  • SIAM had requested IRDAI to not revise the premium rates.

At a time when the entire nation is fighting against the novel COVID-19 by remaining indoors and putting a stop at all non-essential outdoor operations, the economy and industries are bearing the brunt of it. The Society Of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) had already said that the auto industry is incurring a loss of Rs. 2300 crore per day of closure and trying that the situation doesn’t worsen further, SIAM had requested the Insurance Regulatory And Development Authority of India (IRDAI) to not revise the third party motor insurance charges for FY2021. The IRDAI has accepted the submission and will be retaining its premium rate for the financial year.

Rajan Wadhera, President, SIAM stated, “We are thankful to the Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) for keeping the Third Party Motor Insurance Premium Rates unchanged for all vehicle categories for the Financial Year 2020-21. This is in line with SIAM’s submission to IRDAI on retaining premium rates and, thereby, avoiding an increase in the cost of vehicle acquisition for end consumers.”

कोरोना! तुम कल आना – शशि कुमार आँसू

आज वक़्त यकीं से आगे निकलना चाहता है।
एक कोरोना सम्पूर्ण सृजन को निगलना चाहता है।।
एक व्याधि इस अलौकिक लोक मे विध्वंस लाना चाहता है।।
एक कोरोना सम्पूर्ण सृजन को निगलना चाहता है।।

ये मुश्किल की घड़ी है, सुरसा मुहँ बाएं खड़ी है!
हर शख़्स बेहाल है, मानवता बेसुध-बेज़ान पड़ी है।
उपर से ये खूदगर्ज अश्क! हमे हमसे हीं बहाने पर अड़ी है।।

हर तरफ दिल ना-उम्मीद और मन हैरां सा है!
वसुधैव कुटुम्ब स्तब्ध! हर अक्स परेशां सा है!
ऋतम्बरा भी क्षुब्ध है, क्षितिज रुआँसा सा है।
हवा बाहर की कातिल है। हर शख़्स डरा-सहमा सा है!

एक विषाणु देह की दहलीज़ हमारी लांघ कर,
धधकते दिलो की धडकनों पर पहरा लगाना चाहता है।
एक कोरोना सम्पूर्ण सृजन को निगलना चाहता है।।

खिज़ा सुर्ख है इंसा परेशान ज़िंदगी हैरान है !
चीखता मूक नाद है गली-सड़क सब वीरान है
सब कुछ बंद है स्कूल, दफ्तर और न दुकान है ।।

कैसा मंज़र है! सृजन के दरवाजे पर ताला हैं।
हर तरफ सिहरन है खौफ का शाया काला हैं।
सबको सबसे खतरें हैं! फ़िज़ा में कोरोना का जाला हैं।।

वक्त पहिया रोककर, हमारी सब्र का इम्तिहान लेना चाहता है।
बड़ा निर्दयी कातिल है ये हमें हमसे हीं दूर करना चाहता है।
एक कोरोना सम्पूर्ण धरा को काल के गाल में समाना चाहता है ।।
आज वक़्त यकीं से आगे निकलना चाहता है।
एक कोरोना सम्पूर्ण सृजन को निगलना चाहता है।।

मेरी हमनफस, मेरे अज़ीज़, मेरे मोहसिन
तू क्यूँ परेशान है! तू परेशां ना हो।
माना लंबी मुश्किल की हैं इक्कीस रातें, मगर रात हीं तो है!
ये भी गुज़र जायगा, तेरा साथ, मेरे साथ हीं तो है।

हाँ मंज़र खौफनाक है, पर ये सच्चाई नहीं जाने वाली,
यकीं कर खुदा है तो उसकी खुदायी नहीं जाने वाली।।
गर मन में तेरे राम हैं तो दुआ ये तेरी खाली नहीं जाने वाली ।।

गर नजदीकियों की ख्वाहिश है तो अभी की दूरियाँ कबूल कर
कोरोनाकाल से पार पाना है तो ये लॉकडाउन की मजबूरियां मंज़ूर कर ।
स्वच्छता संक्रमण से लड़ने का अंतिम अस्त्र है तो ये अस्त्र पर गुरुर कर ।।

मेरे यार, मेरे दोस्त, मेरे दुश्मन, मेरे हमवतन
इस वीरान हुए वक्त मे तुम गुलमुहर बन जा।
घर पर रह और घर को और गुलजार किए जा।
प्यार है तो प्यार कर, इश्क है तो इज़हार किए जा।।

रोक ले विघ्न-बाण ये जो धमनियों को गलाना चाहता है.
रुक जा! ठहर जा! आज वक़्त! आगे निकलना चाहता है।
एक कोरोना आज सम्पूर्ण सृजन को निगलना चाहता है।।

*** शब्दार्थ
सुरसा – सुरसा रामायण के अनुसार समुद्र में रहने वाली नागमाता थी। सीताजी की खोज में समुद्र पार करने के समय सुरसा ने राक्षसी का रूप धारण कर हनुमान का रास्ता रोका था और उन्हें खा जाने के लिए उद्धत हुई थी।
खिज़ा पतझड़ की ऋतु । अवनति का समय ।
सुर्ख – लाल (जैसे—सुर्ख़ गाल)।
मूक नाद – लाचार शब्द, ध्वनि
वसुधैव कुटुम्ब – सारी पृथ्वी एक परिवार
स्तब्ध – सुन्न, निश्चेष्ट
ऋतम्बरा – सदा एक समान रहने वाली सात्विक और निर्मल बुद्धि।
क्षितिज – Horizon पृथ्वीतल के चारों ओर की वह कल्पित रेखा या स्थान जहाँ पर पृथ्वी और आकाश एक दूसरे से मिलते हुए से जान पड़ते हैं

मोटर इंश्योरेंस के पक्ष : What Are Parties In General Insurance – Shashi Kumar Aansoo

मोटर इंश्योरेंस के संबंध में तीन पक्ष (Parties) होते हैं —

A. First Party (प्रथम पक्ष):
वह पक्ष (व्यक्ति या संस्था) जो कि जो बीमा खरीदता है वह First Party (प्रथम पक्ष) होता है। बीमा के संबंध में बीमा ग्राहक को प्रथम पक्ष माना गया है।

B. Second Party (द्वितीय पक्ष):
वह पक्ष, जो कि बीमा पॉलिसी बेचता है वह Second Party (द्वितीय पक्ष) होती है। बीमा के संबंध में बीमा कंपनी को द्वितीय पक्ष माना गया है।

C. Third Party (तृतीय पक्ष):
बीमा ग्राहक और बीमा कंपनी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या संपत्ति जो कभी भी किसी वाहन दुर्घटना के चपेट में आ सकता है उसे इन्श्योरेन्स के संबंध में थर्ड पार्टी कहा जाता है अर्थात Third Party (तृतीय पक्ष) वह है जिसे कभी आपके वाहन की टक्कर से नुकसान पहुंच

थर्ड पार्टी इंश्योरेंस ऐसी बीमा पॉलिसी होती है, जिसका फायदा न तो बीमा करवाने वाले कस्टमर (प्रथम पक्ष = First Party) को होता है और न ही बीमा करने वाली कंपनी (द्वितीय पक्ष = Second Party) को होता है बल्कि इस बीमा का फायदा, अलग किसी अन्य क्षतिग्रस्त होने वाले व्यक्ति Third Party या सम्पत्ति को होता है। इसमे उस अन्य व्यक्ति या संपत्ति को हर्जाना मिलेगा, जिसे आपके वाहन से नुकसान पहुंचा है। इसमें आपको या आपके वाहन को हुए नुकसान का कोई क्लेम नहीं मिलेगा।

बड़ों को इज़्ज़त दें Stay Concerned – Shashi Kumar Aansoo

आजकल जरुरी नहीं कि किसी की इज्जत पांव छूने से ही की जाए …
उन्हें देखकर अपना मोबाइल एक तरफ रख देना भी बहुत बड़ी इज्जत है..” ~ Ef vB ..


Today it is not essential to touch a persons feet to give respect ; putting your mobile away on seeing them is great respect also

हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से ऐसे बचाएं टैक्स

मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अगर आपने अब तक टैक्स सेवर नहीं खरीदे हैं तो इन इंश्योरेंस प्रॉडक्ट्स पर विचार करें। अगले वित्त वर्ष से अगर आप नई टैक्‍स व्‍यवस्‍था चुनते हैं तो टैक्स बचाने को लेकर इंश्‍योरेंस की प्रासंगिकता खत्म हो सकती है।

आप भी उन लोगों में हैं जो अपनी टैक्‍स देनदारी घटाने के लिए इंश्‍योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं? मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अगर आपने अब तक टैक्स सेवर नहीं खरीदे हैं तो इन इंश्योरेंस प्रॉडक्ट्स पर विचार करें। अगले वित्त वर्ष से अगर आप नई टैक्‍स व्‍यवस्‍था चुनते हैं तो टैक्स बचाने को लेकर इंश्‍योरेंस की प्रासंगिकता खत्म हो सकती है, क्योंकि नी व्यवस्था में आपको डिडक्‍शन और एग्‍जेम्‍पशन नहीं मिलेंगे।

बहरहाल जानकार कहते हैं कि इंश्‍योरेंस केवल टैक्‍स बचाने के मकसद से नहीं खरीदना चाहिए। मौजूदा टैक्‍स सिस्टम में लाइफ इंश्योरेंस और मेडिक्‍लेम खरीदने पर कई तरह की टैक्‍स छूट मिलती है। इनकम टैक्स कानून, 1961 में कई प्रावधान हैं जिनके तहत आप टैक्‍स डिडक्शन क्‍लेम कर सकते हैं। आइए जानें इनके बारे में।

सेक्‍शन 80C
मौजूदा टैक्स सिस्टम में आप एन्डाउमेंट, होल लाइफ, मनी बैक, टर्म इंश्‍योरेंस और यूलिप (यूनिट लिंक्‍ड इंश्‍योरेंस पॉलिसी) जैसी इंश्‍योरेंस पॉलिसी के प्रीमियम के भुगतान पर सेक्‍शन 80सी के तहत आप डिडक्‍शन क्‍लेम कर सकते हैं। हालांकि, इस सेक्‍शन के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही टैक्‍स छूट मिलती है।

सेक्‍शन 80CCC
सेक्‍शन 80सीसीसी के तहत लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के ऐन्‍युइटी प्‍लान के लिए पे की जाने वाली रकम पर छूट मिलती है। इस सेक्शन के तहत टैक्‍स डिडक्‍शन की सीमा 1.5 लाख रुपये है। यह सेक्‍शन 80सी और 80सीसीडी के तहत छूट में शामिल है। यानी इन तीनों सेक्‍शन को मिलाकर इनके तहत 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है।

पेंशन प्‍लान्स के अमूमन दो हिस्‍से होते हैं। ऐक्‍युमुलेशन फेज और विदड्रॉल या पेआउट फेज। पॉलिसी मैच्‍योरिटी डेट तक आप जो प्रीमियम देते हैं, उसमें से कुल रकम का 60% आप एकमुश्‍त ले सकते हैं। बाकी की रकम नियमित पेंशन के तौर पर आपको मिलती है।

आप सेक्‍शन 80CCC के तहत डिडक्‍शन क्‍लेम कर सकते हैं। डिडक्‍शन की सीमा 1.5 लाख रुपये तक है। वहीं विदड्रॉल फेज में एकमुश्‍त राशि का एक तिहाई टैक्‍स-फ्री होता है। बची हुई रकम को या तो एकमुश्‍त या रेगुलर पेंशन के तौर पर दिया जाता है। इसे उस साल की इनकम माना जाता है. इस पर करदाता को टैक्‍स देना पड़ता है.

सेक्‍शन 10 (10D )
इनकम टैक्स के इस सेक्‍शन के तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्‍योरिटी या इसे सरेंडर करने या इंश्योर्ड व्‍यक्ति की मौत हो जाने पर मिलने वाली रकम (सम अश्‍योर्ड) और बोनस पूरी तरह टैक्‍स फ्री हैं। यह एग्‍जेम्‍पशन सेक्‍शन 10 (10D) के तहत मिलता है।

हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पर टैक्‍स में फायदे
हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी के मामले में आप सेक्‍शन 80D के तहत टैक्‍स छूट ले सकते हैं।

सेक्शन 80D
1- इस सेक्‍शन में लाइफ पार्टनर, बच्चों और अपने लिए प्रिवेंटिव हेल्थकेयर चेकअप की कॉस्ट के साथ हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के लिए आप 25,000 रुपये तक डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।
2-अगर माता-पिता के लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते हैं तो 50,000 रुपये तक एक्स्ट्रा डिडक्शन पा सकते हैं बशर्ते माता-पिता सीनियर सिटिजन हों।

अगर टैक्सपेयर और उसके माता-पिता दोनों की उम्र 60 साल से ज्‍यादा है तो मेडिक्‍लेम पॉलिसी पर 1 लाख रुपये तक डिडक्‍शन क्लेम किया जा सकता है।

मैं तेरा आँसू – शशि कुमार आँसू

उसने ये नही किया
इसने वो नही किया
गिला यही रखकर
सारी उम्र बस गिला किया

ये वो कर सकता था…
पर उसने वो नही किया।
पर जिसने भी जो किया,
उसे किसी ने ये नही पूछा
तूने इतना कैसे किया!

यही होना है होता है
दस्तूर है बुजुर्ग कह गए
पर क्या हमने कुछ किया
हाँ शिकवा बहुत किया
ऑंसू न दे किसी को
ख़ुदा से यही दूआ किया।

कोशिश सच मे हज़ार की
न टूटे साथ किसी का
ना रूठे हाथ किसी का
सब सहोदर रहें 
सब अगोदर रहे
नया कल लिख पाए
हर सोच उत्तरोत्तर रहे

फ़क़त मलाल इस बात का है
बस अपने हीं शक करते रहे 
न जाने क्यूं जलते रहे बुझते रहे
हम की तलाश में, मैं-मैं करते रहे
न जाने क्यूं! किसके आड़ में
न सहोदर रहे न अगोदर रहे

हमने तो लानत देखी है
लाज़िम है की हम बोलेंगे
चौदह बरस का बनवास जिया
हर दिन जिसका अरदास किया

सब साख टूटी सब आंगन छोड़ा
वो फिर भी मेरे हो न सके
मैंने तो अपना कर्म  किया
सब को देखा हर धर्म किया
ना मैंने कोई  स्वार्थ रखा
ना मैंने कोई पार्थ रखा

हाँ मैंने सब्र के चाक रखे
जिसपर मेरे कुछ स्वप्न बुने
मैंने भी सफलता पायी है
कितनो वसंत के जाने पर

फ़नकारो के पावँ पखेरे है
तब जाकर ये नेयमत आयी
भूख में कितने दिन बीते
पावँ में कितने छाले आये
न जाने कितने दर भटकें
तब जाकर फ़क़त एक दीद मिली

सब कहते है बस कर्म करो
फल की चिंता से तुम न घुलो
पर ऐसे कैसे हो जाता है
जब बच्चे बड़े हो जाते है
सब जल्दी वह भूल जाते है।

माना जेनरेशन गैप हो जाता है
पर कर्ता तो कर्ता होता है
वह दुश्मन कब बन जाता है

हमने तो सारे प्रयत्न किये
न जाने किते जतन किये
हम मिल जुल कर सब रह लेंगे
इस बात का भी यत्न किये
पर सारे अनुनय बेकार गए

हमने भी अब यह मान लिया
रेखाओं को सब जान लिया
ये रेखाओ की तो मस्ती है
जो मेरे सिरे नही बस्ती है
सब कुछ छीना कुछ कर न सका
अब किससे किसकी बात करें

सब छोड़ गए ताने देकर
निष्ठुर मैं सब सहता गया
बर्दाश्त सबकी करता गया
एक दिन सब ठीक हो जायेगा
ये सोच कर बढ़ता गया।

न जाने सब कब रूठ गए
मेरी किस बात से टूट गए
मैंने तो न ऐसा चाहा था
सबको अपना ही माना था

हाँ जीवन के आपाधापी में
कुछ भूल हुई कुछ पाप हुआ
कुछ छूट गया कुछ टाल दिया
पर यह कैसा अभिशाप हुआ
कि सब जीत गए मैं हार गया।

होता है अक्सर  होता है
जब रेखाएँ धूमिल होती है
तब नाश मनुज पर छाता है।

मेरी तो रेखा थी हीं नही
आते हीं मिटा दिया मैंने
बढ़ते हीं बुझा दिया मैंने

तब रेखाओ की क्या चाल न थी!
जब माँ ने आंखे मुंदी थी।
तब रेखाओ की मज़ाल न थी!
जब पापा ने साथ छोड़ा था।

अब सब ऐसे है तो क्या करिये
आँसू किस्मत में है तो क्यूँ डरिये
चलो फिर से कोशिश हजार करिये
बस सबका ख्याल बेशुमार करिये।

© शशि कुमार आँसू

अब सब ऐसे है तो क्या करिये
आँसू किस्मत में है तो क्यूँ डरिये
चलो फिर से कोशिश हजार करिये
बस सबका ख्याल बेशुमार करिये। – Shashi Kumar ‘Aaansoo’



Sachin Bansal buys DHFL General Insurance

Flipkart co-founder Sachin Bansal’s bet on the insurance firm is part of his broader ambition in financial services industry.

The deal has been routed through Navi Technologies, formerly BAC Acquisitions which Bansal had founded along with IIT-Delhi batchmate Ankit Agarwal after selling stake in Flipkart in 2018.
Sources said Bansal has bought out the entire stake in the insurer, held by Kapil
Wadhawan-owned WGC. “Navi is actively scouting for opportunities in BFSI space,” a spokesperson for the company said when contacted . “Specifically, it is interested in the intersection of technology and financial services, where we believe technology can be harnessed to improve access and availability of financial services,” the spokesperson said.

DHFL General Insurance has about Rs 400 crore assets under management.
“Bansal wants to get a footing into the banking and financial services sector. There has been a lot of talk about him being keen on obtaining a banking licence and has been looking at opportunities in the asset management space,” a source said. Bansal’s move to step into the insurance sector comes on the back of Navi Technologies acquiring a majority stake in Chaitanya Rural Intermediation Development Services, which runs a microfinance platform. Having picked up more than 90% stake in Chaitanya, he took over as its chief executive last year.

How To Renew Your Car Insurance – Know the Basic Facts of General Insurance : (आपकी गाड़ी का इंश्योरेंस रिनूअल)

आपकी गाड़ी का इन्सुरंस सही समय पर रिनूअल हो ये मोटर व्हीकल एक्ट के तहत आपकी कानूनी व अहम् जिम्मेदारी है ख्याल रहे मोटर इंश्योरेंस एक्ट के अनुसार भारत में थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस अनिवार्य है।
कभी-कभी हम जानकारी के अभाव में या गलत जानकारी के वज़ह से अपनी गाड़ियों की बीमा में टालमटोली कर बैठते है और बड़े जोखिम को वेवज़ह न्योता दे बैठते हैं । लोग इन्श्योरेन्स न होने की भयावहता से शायद परिचित नहीं होते है याद रहे इन्श्योरेन्स हमे कोई खुशी प्रदान तो नहीं करती पर पर पर इसकी अनुपस्थिति हमारी खुशियों पर ग्रहण जरूर लगा जाती है। हम कुछ पैसे बचाने के चक्कर मे अपनी खूद की गाड़ियों का इंश्योरेंस नहीं करके अपना हीं नुकसान कर बैठते हैं।

आज सभी प्रमुख इंश्योरेंस कंपनी हर जगह प्रमुखता से से उपलब्ध है। आप आपकी कार के इन्श्योरेन्स का तुलनात्मक अध्ययन व उसके सभी उपलब्ध सुविधाओं के बारे मे रिनूअल के पहले सटीक जानकारी ले सकते हैं। आज ज्यादातर जनरल इन्श्योरेन्स कंपनी अपने रिनूअल के लिए सारे ऑनलाइन पेमेंट का विकल्प देती है और साथ मे आपका एजेंट भी आपंकों एस काम मे मदद करते है।

आजकल के डिजिटल वर्ल्ड मे जानकारी प्राप्त करना बेहद आसान है बस जरूरत है की आप सब्जेक्ट मैटर को बेहतर ढंग से समझे इसलिए यदि आपके कार इन्श्योरेन्स का रिनूअल नजदीक है, तो चलिए कुछ ध्यान रखने वाली कुछ बेहद इम्पोर्टेन्ट टर्म्स को जान लेते हैं ….

. सही इंश्योरेंस कंपनी का चुनाव (Select the Correct Insurance Company) : अगर आपकी वर्तमान इन्सुरंस कंपनी आपको सही सुविधा नहीं दे रही तो रिन्यूअल के वक्त आप नए इंश्योरेंस कंपनी में अपनी कार का इन्सुरंस रिन्यूअल करवा सकते हैं पर ख्याल रहे कम प्रीमियम के चक्कर में आप गलत सिलेक्शन न कर बैठे। आप सही कंपनी के चुनाव करते वक्त यह सुनिश्चित कर ले की उक्त कंपनी की सर्विस आपके शहर में या उसके आस पास के शहरों में उपलब्ध है या नहीं ! ऐसा न हो की जरुरत पड़ने परआपको मदद हीं न कर सकें. आप उसकी लोकल ब्रांच की उपलब्धता जरूर देख लें ।

२. इंश्योरेंस के प्रकार की सही जानकारी (Find The Correct Insurance Coverage Type): आप एक बार सही इन्श्योरेन्स कंपनी की तलाश अगर पूरी कर लेते हैं तो अप अपनी कार के लिए सही कवरेज के बारे में जानकारी का पता लगायें. आपके कौन-कौन सी कवरेज की आवश्यकता है और उनकी बेस्ट कीमत कितनी है, इसका पता लगाएं।  आप आपने एजेंट से अपनी रिन्यूअल नोटिस की मांग करें और दिए गए कवरेज को समझे या आपने एजेंट की सहायता लें। आप कंपनी के कस्टमर केयर को कॉल करके भी आपकी रिनूअल में दिए गए कवरेज की जानकारी ले सकते हैं। ऐसे प्रचलित रूप से हमारे इंडिया मे मोटर इंश्योरेंस मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं…

  • कंप्रिहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी(Comprehensive Insurance ):

    यह एक प्रकार की नियमित मोटर पॉलिसी होती है। इसका दायरा भी बड़ा होता है। इसके तहत इंश्योरेंस कंपनी फर्स्ट पार्टी यानी आपका एवं थर्ड पार्टी अर्थात आपके अलावा अन्य किसी का दुर्घटना में हुए जान माल का नुकसान का खर्च की भरपाई करती है। बोलचाल की भाषा में इसे फुल पार्टी इन्सुरंस भी कहते  हैं।
  • थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स पॉलिसी (Third Party Insurance):

    थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स कानूनन अनिवार्य होता है। थर्ड पार्टी इंश्योरेंस को समझने के पहले हमें यह जान लेना चाहिए कि “थर्ड पार्टी” क्या होता है…

दरअसल मोटर इंश्योरेंस के संबंध में तीन पक्ष (Parties) होते हैं —  

  1.  First Party (प्रथम पक्ष): वह पक्ष (व्यक्ति या संस्था) जो कि जो बीमा खरीदता है वह First Party (प्रथम पक्ष) होता है। बीमा के संबंध में बीमा ग्राहक को प्रथम पक्ष माना गया है।
  2. Second Party (द्वितीय पक्ष): वह पक्ष, जो कि बीमा पॉलिसी बेचता है वह Second Party (द्वितीय पक्ष) होती है। बीमा के संबंध में बीमा कंपनी को द्वितीय पक्ष माना गया है।
  3. Third Party (तृतीय पक्ष): बीमा ग्राहक और बीमा कंपनी के अलावा कोई अन्य व्यक्ति या संपत्ति जो कभी भी किसी वाहन दुर्घटना के चपेट में आ सकता है उसे इन्श्योरेन्स के संबंध में थर्ड पार्टी कहा जाता है अर्थात Third Party (तृतीय पक्ष) वह है जिसे कभी आपके वाहन की टक्कर से नुकसान पहुंच सकता है।  

    थर्ड पार्टी इंश्योरेंस ऐसी बीमा पॉलिसी होती है, जिसका फायदा न तो बीमा करवाने वाले इन्शुर्ड (प्रथम पक्ष=First Party) को होता है और न ही बीमा करने वाली कंपनी (द्वितीय पक्ष=Second Party) को होता है बल्कि इस बीमा का फायदा, अलग किसी अन्य क्षतिग्रस्त होने वाले व्यक्ति Third Party या सामान को होता है। सिर्फ उस अन्य व्यक्ति या संपत्ति को हर्जाना मिलेगा, जिसे आपके वाहन से नुकसान पहुंचा है। इसमें आपको या आपके वाहन को हुए नुकसान का कोई क्लेम नहीं मिलेगा।
  • Standalone OD/ SAOD Insurance (स्टैंड अलोन ओ डी रिन्यूअल ): सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अगर आप नये दोपहिया वाहन खरीदते है तो पाँच साल का और प्राइवेट कार खरदते हैं तो तीन साल का थर्ड पार्टी इन्श्योरेन्स अनिवार्य रूप से करना पड़ेगा । इसी लिए IRDAI ने 1 सितंबर 2018 से नई व पुरानी कारों और दोपहिया वाहनों के लिए नई इन्श्योरेन्स पॉलिसी स्टैंडअलोन ओडी कवर की की व्यवस्था की है। अगर आप दोपहिया गाड़ी खरीदते है तो अक्सर आपकी इन्श्योरेन्स 1+5 टर्म (1 Year OD + 5 Years TP Cover) की मिलती है जहाँ एक साल कंप्रिहेंसिव कवर और बाकी अगला चार साल थर्ड पार्टी कवर हीं होता है, वही अगर आप कार खरीदते हैं तो वह १+३ टर्म (1 Year OD + 3 Years TP Cover) की होती है इसका सीधा मतलब एक साल कंप्रिहेंसिव कवर और बाकी अगला दो साल सिर्फ थर्ड पार्टी कवर हीं होता है । जब आपकी गाड़ी का एक साल पुरानी होती है तो आपके गाड़ी के OD कवर का रिनूअल इसी स्टैंड अलोन ओडी रिन्यूअल के तहत होता है ताकि आपकी गाड़ी का कंप्रिहेंसिव रिस्क चालू रहे .
    आजकल सभी इन्श्योरेन्स कंपनी प्रमुखता से स्टैंडअलोन ओडी इंश्योरेंस कवरेज प्रदान करती है।

3 .सही ऐड ऑन प्लान का चुनाव (Select The Correct Add-On Plan): आपकी कार का बेसिक कंप्रिहेंसिव इन्श्योरेन्स कवरेज मे बहुत सारे कन्डिशन होते हैं जिसके कारण दुर्घटना के बाद पूरा हर्जाना या क्लेम नहीं मिल पता पता है अतः सही ऐड-ऑन कवर का चुनाव अतिअवाश्यक है. जैसा कि नाम बताता है, यह आपके  नियमित मोटर पॉलिसी के दायित्व के अतिरिक्त, कुछ ऐड ऑन रिस्क कवर करती है जिसे कुछ अतिरिक्त राशि का भुगतान करके प्राप्त किया जा सकता है। आज हरएक इंश्योरेंस कंपनी आपके मूल मोटर बीमा पॉलिसी के साथ कई वैकल्पिक एड-आँन कवर दे रही है। यदि सही कवर चुना जाता है तो ये मनीसेवर्स हैं। ऐड-ऑन एक बेसिक कार इंश्योरेंस पॉलिसी का दायरा भी बढ़ाते हैं।

कुछ प्रचलित ऐड-ऑन कवर इस प्रकार हैं….(Following are Some Popular Add-on Coverage Options…

  • ज़ीरो डेप्रीसियेशन कवर (Zero/Nil Depreciation Reimbursement Cover):  आपकी गाड़ी में एक्सीडेंट के वज़ह से या अन्य किसी कारन से  किसी भी तरह का नुकसान पहुचता है तो इन्श्योरेन्स कंपनी क्लेम के बाद बदले गए पार्ट्स की कीमत का पूरा भुगतान नहीं करती बल्कि एक निश्चित प्रतिशत की राशि काट कर क्लेम का भुगतान करती है।  उसी काटे गए रकम को क्लेम डेप्रीसियेशन (मूल्यह्रास) कहते हैं जैसे सभी प्रकार के रबर/नायलॉन/प्लास्टिक पार्ट्स, टायर और ट्यूब, बैटरी और एयर बैग के लिए-50% और फाइबर ग्लास के लिए – 30% डेप्रीसियेशन होता है.  मेटल और लकड़ी के पार्ट के लिए उसके उम्र के अनुसार क्लेम अमाउन्ट मे से डेप्रीसियेशन किया जाता है जो की पहले 5% से 50% तक जाता है. यदि आप ज़ीरो डेप्रीसियेशन कवर / निल डेप्रीसियेशन का विकल्प चुनते हैं, तो नुकसान के मामले में इन्श्योरेन्स कंपनी आपके क्लेम के वक्त किसी भी तरह की कटौती/डेप्रीसियेशन नहीं करती है।
  • इंजन सिक्योर (Engine Secure Cover): इंजन में पानी के प्रवेश के कारन या इंजन से लुब्रिकेंट के रिसाव के कारन आपकी गाड़ी के इंजन, गियर बॉक्स या ट्रांसमिशन असेंबली में किसी भी प्रकार की क्षति पहुचती है तो इंजन सिक्योर कवर हीं इंजन और गियर बॉक्स के आंतरिक भागों के नुकसान की मरम्मत या रिप्लेसमेंट के खर्चों को कवर करती है।
  • रिटर्न टू इन्वाइस (Return to Invoice Cover): अगर आपकी गाड़ी चोरी हो जाती है या एक्सीडेंट के बाद टोटल लॉस केटेगरी मे आती है तो इन्श्योरेन्स कंपनी सिर्फ आपको आपकी गाड़ी के  IDV (सम इन्शुर्ड वैल्यू) या करंट रिप्लेसमेंट वैल्यू का क्लेम पेमेंट करती है पर अगर आप रिटर्न टू इन्वाइस ऐड ऑन कवर का विकल्प चुनते है तो ऐसी परिस्थिति आपको आपकी गाड़ी के IDV (सम इन्शुर्ड वैल्यू) के जगह गाड़ी की इन्वाइस वैल्यू (खरीदने व्यक्त की कीमत) का भुगतान करती है. इसके साथ-साथ  फर्स्ट टाइम रजिस्ट्रेशन चार्ज और रोड टैक्स का भी का भुगतान करती है. आप चंद और पैसे लगाकर नयी गाड़ी ख़रीद सकते है।
  • कंज़्यूमेबल्स कवर (Consumables Expenses Cover) : आपकी गाड़ी मे क्लेम के बाद नुकसान की मरम्मत या रिप्लेसमेंट के दौराननट बोल्ट, कूलेंट, इंजन ऑइल, ब्रेक ऑइल, बेयरिंग, ग्रीस, कन्डिशनर गैस आदि जैसी कंज्यूमेबल्स आइटम की कीमत कार इंश्योरेंस में कवर नहीं होती है हाँ अगर आप ‘कंज्यूमेबल्स कवर ऐड-ऑन’ का विकल्प लेते हैं, तो आपको कंज्यूमेबल्स आइटम मे किए गए खर्च का मुआवजा मिल सकता है।
  • की रिप्लेसमेंट कवर (Key Replacement Cover) : अगर आपकी गाड़ी की चाभीखो जाती है या चोरी हो जाती है या चाभी आपकी गाड़ी में ही टूट जाती है तो यह की (चाबी) रिप्लेसमेंट कवर हीं उसे मरम्मत या बदले जाने की खर्च को कवर करती है. अमूमन यह बेसिक इन्श्योरेन्स पॉलिसी मे कवर नहीं होता है। इस कवर को प्राप्त करने के लिए पुलिस शिकायत अनिवार्य है।
  • टायर सिक्योर कवर (Tyre Secure Cover) : आपकी नॉर्मल इन्श्योरेन्स पॉलिसी सिर्फ टायर या ट्यूब मे हुए नुकसान को कवर नहीं करती है।  जब एक्सीडेंट के वजह से आपकी गाड़ी को तो कोई नुकसान नहीं होता पर टायरों और ट्यूबों को नुकसान पहुँचता है जैसे बबल, पंचर, बर्स्ट या कट जाना या क्षति होना तब टायर सिक्योर कवर उसे रिप्लेसमेंट करने या उसे मरम्मत किए जाने वाले खर्चों को कुछ शर्तों के साथ कवर करती है।

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ISRO likely to purchase first insurance policy for satellite

According to the information from sources, the Indian Space Research Organisation (ISRO) is eying to buy its first insurance policy for a domestically launched space satellite, the first since it began launching satellites in 1975.
There can be two factors which are expected to have been influencing ISRO to begin buying satellite insurance.

Firstly, there is an unexpected setback in Project Chandrayaan-2, which cost nearly INR10 billion (US$139.4 million). Secondly, there is the success of ISRO’s Mars mission, which brought down reinsurance rates for Indian space exploration activities.

While ISRO has not insured launches conducted on Indian soil, it has typically insured launches done in partnership with other countries, such as Russia and the US. New India Assurance and other state-owned insurers were typically those tapped to provide cover for these projects, with reinsurance from the international market.

द्राैपदी ! ख़ुद हीं अब गांडीव उठाओ

हे द्राैपदी !
ख़ुद हीं अब गांडीव उठाओ
गोविंद अब ना आएंगे…
छोड़ो मेहंदी खड्ग संभालो
दुःशासन से चीर बचा लो
गोविंद अब ना आएंगे…

#HyderabadHorror

Good Ones Never Come Easy

Never miss out on a good person that can make your life great because they’re a little difficult, the good ones never come easy.

#Inspiration #information #Insurance
#InspiringShashi #quotes #miss #goodperson #life #great #difficult #goodperson #difficult #relationships

IRDAI sets up working group to review title insurance structure

A working group has been constituted by IRDAI ( Insurance Regulatory and Development Authority of India) to revisit the product structure of title insurance, develop a standard product and recommend measures to spur demand for the product. The decision comes in the backdrop of a less-than-desired response to title insurance products. “The number of title insurance policies sold is minimal despite availability for the last one and half years and the obligation cast under the Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 upon promoter/developers to obtain the said policy,” said the IRDAI order, while constituting a 12-member working group.

There are very few general insurers that offer title insurances and their product features vary in policy terms and conditions and scope of coverage depending on the support received from their reinsurers. While stating this, IRDAI said the feedback received from the Government of India revealed that stakeholders, especially developers associations, had flagged the need for standardisation in title insurance products.

The working group has been formed with a deadline of three months to submit the report. Apart from developing a standard product and coming out with recommendations to spur demand, the group will examine the legal and regulatory framework in place and its impact on the marketability of title insurance; study the structure of such products available and analyse reasons for sluggish demand; and suggest augmentation of reinsurance capacity in the domestic market.