Learnings from Chanakya Neeti – Stay With Perishable First

यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥

01-13

Hindi Translation
जो निश्चित को छोड़कर अनिश्चित का सहारा लेता है, उसका निश्चित भी नष्ट हो जाता है। अनिश्चित तो स्वयं नष्ट होता ही है।

महान चाणक्य नीति के अपने पहले ही अध्याय के तेरहवें श्लोक में बताया गया है कि हम इंसान हर हाथ आई चीज को अपनी ही गलती से गंवा देते हैं। ऐसे मूर्ख सिर्फ प्लानिंग करते रहते हैं और जो चीज उनकी पहुंच में है उसे प्राप्त नहीं करते हुए उन चीजों के पीछे भागते हैं जो कभी उनकी हुई नहीं।

ऐसे लोग हर काम में लापरवाही करते हैं। अपने लक्ष्य विहीन मार्ग पर यूं ही विचरण करते पाए जाते हैं।

आवश्यक यह है कि आप पहले जो आप कर सकते है उसे कटिबद्धता पूर्वक संपन्न करें और एक सुनिश्चित योजना के निहित ही ख़ुद को ड्राइव करें।

English translation:

He who gives up what is imperishable for that which is perishable, Loses that which is imperishable; and doubtlessly loses that which is perishable also.

Learnings from Chanakya Neeti – The Right Time : 4.18

कः कालः कानि मित्राणि को देशः कौ व्ययागमौ ।
कश्चाहं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुहुः ॥

Consider again and again the following: the right time, the right friends, the right place,
the right means of income, the right ways of spending, and from whom you derive your power.

इन बातो को बार बार गौर करे…सही समय, सही मित्र, सही ठिकाना, पैसे कमाने के सही साधन, पैसे खर्चा करने के सही तरीके, आपके उर्जा स्रोत ।

Source: Chanakya Neeti 4.18