Fight In The Arena – मेरी बात

You Must Not allow people to mistune your emotions & poison the day with their words. Some People find opportunity to dash You Therefore You need to have patience. Bring Stability, permanence (ठहराव) in your Karma. Don’t let impatience mind govern your decisions & actions. Impatience behavior gives nothing except pang of guilt. Keep yourself calm & ambitious enough to fight with all petty things.

When you are #ambitious you automatically busy & when you busy you automatically respectful for other person & profession . Critics are the least ambitious one who avoid failure doing nothing but criticizing others. Here the man only matters who fought in the arena.

Be the man of arena. keep rejuvenating yourself. Learn & Rise

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मैं वक़्त हूँ फिर न वापस आऊंगा – कविता

मै वक्त हूँ फिर न वापस आऊंगा
जब बेला आएगी अलविदा कह जाऊंगा ।

तेरी तुम फिर अब देख लो
कुछ बचा है! तो तुम समेट लो
तुम देख लो क्या लाए थे!
तुम सोच लो क्या पाए लिए!

क्या मिल गया जो ठहर गए!
क्या कर लिया जो यूँ बिफर गए!
तुम किस नगर में ढल गए…
तुम किस डगर को चल दिए।

तुम किस कदर के ढीठ हो
ना जीत की तुझमे आग है,
ना प्रीत की तुझमे राग है,
सांत्वना बस अपरम्पार है।

तुम सोचते हो क्या हो जाएगा!
जो नसीब में है सब मिल जाएगा!
वो क्या है जिस पर गुमान है!
क्या अंतिम तेरी यही उड़ान है!

अंगीकार तुझे इस बात का हो
की तुम शुन्य पर सवार हो।
बहानों से भरे तेरे तिलिस्म मे,
तुम आत्ममुग्धता के शिकार हो।

तेरे बाजुओं में क्या दम नहीं
या जीत का अवचेतन नहीं!
जब सब छोड़कर तुम जाओगे!
किस बात पर आह्लाद पाओगे!!

तुम्हें किस कमी की शिकायत है?
जो नहीं मिला, तो नहीं मिला
जो नहीं किया, तो नहीं किया
ये सोच कर तु गिला न कर।

सब रिवायतों को तुम तोड़कर
सब जकड़नो को तुम छोड़ कर
जो पल बचा उसे सब जोड़ कर
प्रतिज्ञा तुम अब कठोर कर!

प्रचंड धीर अब बनेगा तुम।
न थकेगा तुम, न रुकेगा तुम।
कमजोरियों को तज़ कर सब,
श्रम की पराकाष्ठा करेगा तुम।।

मै वक्त हूँ फिर न वापस आऊंगा
नादान हो! मुझे जुमला समझ लो!
सुजान हो! मेरे इश्क़ मे पड़ लो।
मै वक्त हूँ नाम तेरा स्वर्णाक्षर से लिखऊँगा।

कविता By शशि कुमार ‘आँसू’

संघर्ष तेरा हो तो क्यूँ नहीं वो राम सा हो
प्रयत्न तेरा हो तो क्यूँ नहीं वो श्याम सा हो।

#Disclaimer – Opinions expressed are solely my own or drawn from innumerable centers of culture & lore. It do not express the views or opinions of my employer.

Good Ones Never Come Easy

Never miss out on a good person that can make your life great because they’re a little difficult, the good ones never come easy.

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Always being moved Toward

No matter where you are, no matter how difficult things might appear to be, you are always being moved toward magnificence. Always.

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सबसे खतरनाक होता है, हमारे सपनों का मर जाना – पाश

क्या आप #पाश को जानते हैं ! हाँ “अवतार सिंह संधू” इनका पूरा नाम यही है। इनकी हर लिखी पक्ति आज भी शूलगता हुआ शोला है। आज दुनियाँ जैसे भी उन्हे याद रखे पर उनकी रचित हर कविता मे सच्चाई की एक भीषण गंध है जोआपके अंतर्मन को झकझोर कर रख देती है।

आज पाश को जिस भी पक्ष से आप देख लें पर उनकी सारगर्भिता आप झूठला नहीं सकते। उनकी बेहद तल्ख और धारदार पंक्तियाँ पिघले लोहे की भांति आपके हर शय को चीरती हुयी आपके अंतर्मन में लहूलुहान हो चुके हर अनुभति को शब्दों दे देती है। शायद यही कारण है की आज भी उनकी कविता उतनी हीं रेलवन्ट मालूम पड़ती है जितनी कभी वो अपने दौर मे थी।

पाश हमे अक्सर आगाह करते रहे हैं साथ मे प्रेरित भी करते हैं कि आप जिस भी स्थिति मे हों उसे बेहतर करने की जद्दोजहद करते राहनी चाहिए। उनकी रचित एक बेहद लोकप्रिय कविता “मेहनत की लूट” चाहे जिस भी परिस्थिति मे लिखी गई हो पर आज भी उतना ही प्रासांगिक है । हर शब्द वेदना और विद्रोह की भीषण गंध लिए आपको प्रेरित करती है और बेहतर सपने देखने की हिम्मत देती है।

याद रहे, बेहतर कल का निर्माण आज के बेहतर सपनों से होती है और बेहतर आज के लिए अथक परिश्रम की जरूरत है। जरूरी नहीं कि हमारे सपने राजनीति के तराजू पे तौले जाएं और लेफ्ट और राइट विंग के चक्कर मे यूं हीं दम तोड़ दे। हम अक्सर समाज मे बदलाव के लिए आवाज उठाने की खोखली कोशिश करते रहते हैं पर शायद खूद के खोंखलेपन के वजह से किसी दूसरों के अजेंडा का एक मोहरा बन कर रह जाते हैं।

हमारी सफलता-असफलता के लिए हमसे ज्यादा कोई और जिम्मेदार नहीं हो सकता। हमने सपने देखना छोड़ दिया है। जो बहुमूल्य प्रयास पहले हमारे खूबसूरत कल के लिए होना चाहिए वो न जाने क्यों बिखर सा गया है … हमारे सपने मर से गए है और ये सबसे खतरनाक है

मेहनत की लूट कविता अपनी श्याह पक्ष के साथ भी आज की प्रासंगिकता में उतनी ही सार्थक है.

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Gayatri Mantra – Why, How and The Importance

ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥

Transliteration:

oṃ bhūrbhuvaḥ svaḥ। tatsaviturvareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi। dhiyo yo naḥ pracodayāt॥
Hindi Translation:

ॐ हम उस दिव्य सूरज का ध्यान करतें हैं, जो सभी को प्रकाशित करता है, जिनसे सभी आगे बढ़ते हैं। हे प्रभु, क्रिपा करके हमारी बुद्धि को उजाला प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये।

English translation:

We meditate on the glory of that being (Savitur, the sun) who has produced this universe, who is the essence of our life existence; May we imbibe his divinity and brilliance within us.


The purpose of Gayatri Mantra!

The purpose of Gayatri mantra is to offer prayers to the sun god, Savitur. The god which has given us everything, which has made life possible on this planet, which grants us light and energy. The sun which always gives and never asks for anything in return, the Gayatri mantra is a way of giving back in the form of prayer and respect to that ever-giving entity. This mantra invokes a sense of inclusiveness; imagine you offering respects to the sun on behalf of all the beings in this world, wouldn’t that make you think much larger than just yourself? The correct mindset that we all need when we begin our day.

Why Gayatri Mantra is so popular?

Gayatri Mantra is from one of the oldest texts ‘Rig Veda’, composed by Sage Vishwamitra. It is a popular belief that Vishwamitra after long practice and penance discovered Gayatri mantra which according to him was not just a boon for himself but for the entire mankind. Upon chanting this mantra, the chanter and the listener both are most benefited with the vibrational positive energy of the mantra. And the fact that many practitioners have found Gayatri mantra so enriching, it has become popular over the centuries.

 

The Analysis (Dissection) of the Gayatri Mantra:

 (OM): The primeval sound
भूः (Bhur): Earth = Mooladhara; the physical body/physical realm
भुवः (Bhuvah): Akash; the life force/the mental realm
स्वः (Swah): Heaven= Swadhishthana; the soul/spiritual realm
महः (Maha): Heart region.
जनः (Jana): To say ‘no’ for life and death.
तपः (Tapa): Ascetic practices in vishuddhi & Agnya.
सत्यम् (Satyam): Up to the Third Eye ( Brahma-Randhra ).
तत् (Tat): That – situated as it is; That (God)
सवितुर् (Savitur/Savita): Sa + Va + Ta = Sun, Ganges, Fire, Earth etc. including those endowed with knowledge and yoga.
र्वरेण्यं (Vareñyam): Va + Re + N + Ya + M : God Varuna; adore
भर्गो (Bhargo): Bha + Ra + Ga; effulgence (divine light)
देवस्य (Devasya): Da + Va + S + Ya; Supreme Lord
धीमहि (Dhīmahi): Dha + Ma + Ha; meditate
धियो (Dhiyo/Dhiya): Dha + Ya; the intellect
यो नः (Yo Nah): Ya + Na; May this light, Nah: Our
प्रचोदयात् (Prachodayāt): Pa + Ra + Cha + Da + Ya + T; illumine/inspire

When to chant the Gayatri Mantra?

It is advised to repeat Shanti (peace) thrice at the end of the chanting of the Mantra, which will give peace to three entities – body, mind, and soul. During the three positions of sun namely lower sky in the east (morning), mid sky (noon) and lower sky in the evening (dusk), are the best times to chant Gayatri Mantra.Therefore,

The day is divided into three parts:

4 am to 8 am and 4 pm to 8 pm have the Sātvic quality
8 am to 4 pm are Rājasic
8 pm and 4 am are Tāmasic

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Gayatri Mantra | Rig Veda 3.62.10

उत्तम से सर्वोत्तम

उत्तम से सर्वोत्तम वही हुआ, जिसने आलोचनाओं को सुना, सहा व समझ कर सुधार करने की ज़िद्द की।

कुछ शब्द : एक अज़ीज़ दोस्त के लिए : Md. Reza

रज़ा अब रुकना नही
बस कारवां बुनते रहना,
अब तुम झुकना नही
बस मंज़िले चूमते रहना।

सफ़र में लोग मिलेंगे
कुछ तुमसे बेहतर कहने वाले
कुछ तुमसे बेहतर सुनने वाले,
कुछ नासमझ कुछ नासाज़।

सफ़र में लोग मिलेंगे
कुछ फिक्र को सर पे ढ़ोने वाले,
कुछ दर्द के पैवन्द को सीने वाले
कुछ तेरे वाले कुछ मेरे वाले।

सफ़र में लोग मिलेंगे
कुछ सर्वस्व देने वाले,
कुछ जो भी है ले लेने वाले,
कुछ इधर वाले तो कुछ उधर वाले।

बस रुकना नही
दकियानूसी ख्यालो से बचना
यूं ही बेफ़िक्र होकर फिक्र करना
बेख़बर पर ख़बर रखना।
बेमुरव्वत हीं सही पर बेसब्र रहना
बेबाक लिखना, बेझिझक कहना।

The Declaration : The Poem…Read it, Study it, Recite it and then Live it

The Declaration

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Today I declare that my past will no longer limit my future and just because I couldn’t achieve something yesterday doesn’t mean I won’t do it this day.

Today I declare that I’ll honor my talents, express my gifts and reveal my creativity to everyone around me.

Today, I declare I’ll be loyal to my values, respectful of my mission and fiercely focused on my dreams.

Today, I declare that I am a maker versus a consumer, a giver versus a taker and a visionary versus a victim.

Today, I declare that I will always be part of the solution and never part of the problem.

Today, I declare that when I fall, I will certainly rise and when I’m in doubt, I will persist.

Today, I declare that I will cherish my health, feed my mind and nourish my soul.

Today, I declare that I am surrounding myself with people who are smarter, faster, stronger and better than me so I am uplifted by their models and inspired by their examples.

Today, I declare that I set the standard in my work, am becoming the icon of my industry and a legend at my craft.

Today, I declare that I adore my family, am grateful for my friends and am an encourager to all those who are blessed to cross my path.

Today, I declare that this New Year is MY year. My time to grow, excel, laugh, love, win, believe, persevere and serve, knowing that I am truly the leader of my fate, the owner of my results and the hero of my destiny.

Today, I declare I am strong and brave, not timid nor weak

The poem…read it, study it, recite it and then live it… 

May this to be YOUR year, the year you step into your truest power, own your highest talents and create results that are nothing less than monumental.

A Poem by Robin Sharma
#1 bestselling author of The Leader Who Had No Title

Posted from WordPress for Android By Shashi Kumar Aansoo