तेरा ख्याल – शशि कुमार आँसू

तेरा जब भी ख्याल आता है…
ख़ुद के नशे में महुए सा टपक जाता हूँ।
अक्खड़ प्रेमी सा चलता हूँ… लड़खड़ाता हूँ।

तेरा जब भी ख्याल आता है…
सुर्ख उढ़हूल सा लहलहा के खिल जाता हूँ।
मोगरे की खुशबू सा फिज़ा मे बिखर जाता हूँ।

तेरा जब भी ख्याल आता है…
सुनसान मेरे बस्ती मे गाता हूँ गुनगुनाता हूँ।
भीगी बारिश मे मोरनी सा चहचहाता हूँ।

तेरा जब भी ख्याल आता है…
खुले आसमान मे सैर पर चला जाता हूँ।
चाँद को देखता हूँ मंद मंद मुस्कुराता हूँ।

तेरा जब भी ख्याल आता है…
तेरी असीम यादों मे गुम हो जाया करता हूँ।
थोड़ा ठहरता हूँ फिर गुमसुम हो जाता हूँ।

तेरा जब भी ख्याल आता है…
मैं बस टूटता हूँ, बिखरता हूँ, छटपटाता हूँ…
तेरी यादों मे मैं तुझे हीं ओढ़ता बिछाता हूँ।

तेरा जब भी ख्याल आता है…
तेरे एहसास से हीं आह्लादित हो जाता हूँ
खुशबू में तेरी डूब प्रेम की पराकाष्ठा मैं पाता हूँ।

लेखक :: शशि कुमार आँसू @shashiaansoo


इश्क़ है..

हुस्न के क़सीदे तो गड़ती रहेगी, महफिले..! झुरिया भी प्यारी लगे, तो मान लेना इश्क है..!