नचिकेता की कहानी : दुनिया का पहला जिज्ञासु

कठ उपनिषद में नचिकेता को सबसे पहला साधक बताया गया है। नचिकेता मृत्यु का भेद जानने के लिए यम के द्वार तक पहुंच गया था। जानते हैं नचिकेता के प्रश्न और यम के उत्तर के बारे में

नचिकेता के पिता का यज्ञ
नचिकेता को दुनिया का पहला जिज्ञासु माना जाता है – कम से कम पहला महत्वपूर्ण जिज्ञासु। एक उपनिषद् भी उस से शुरू होता है। नचिकेता एक छोटा बालक था। उसके पिता ने एक यज्ञ करने की शपथ ली थी। यह एक ऐसा पवित्र अनुष्ठान था, जिसमें उन्हें अपनी सारी सांसारिक संपत्ति – अपना घर, अपना सारा सामान, यहां तक कि अपनी पत्नी, अपने बच्चे, यानी अपना सब कुछ ऋषियों, ब्राह्मणों और दूसरे लोगों को दान में दे देना था। इस तरह के यज्ञ से आप आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करते हैं। यह एक ऐसा साधन है, जिसे पारंपरिक रूप से रचा गया है।

नचिकेता के पिता ने बेकार की चीज़ें दान कर दीं
कुछ लोग आध्यात्मिक ज्ञान के लिए इस तरह का शपथ लेते हैं। नचिकेता के पिता ने यह शपथ ली और और उन्होंने अपनी सभी बीमार गायें, बेकार संपत्ति और जिन चीजों की उन्हें जरूरत नहीं थी, जो किसी न किसी रूप में उनके लिए बोझ थीं, वे सब दान में दे डालीं। उन्होंने खूब दिखावा किया मगर जिन चीजों की उन्हें वाकई जरूरत थी, जैसे अपनी दोनों पत्नियों और बच्चे को, उनको उन्होंने अपने पास ही रखा। नचिकेता को यह सब देखकर बहुत दुख हुआ। उसने देखा कि उसके पिता ने ईमानदारी नहीं दिखाई। उसके पिता ने शपथ ली थी कि वह सब कुछ दान करके आध्यात्मिक आनंद प्राप्त करेंगे, मगर उन्होंने चालाकी की। नचिकेता अपने पिता के पास गया और इस बारे में उनसे बात करने लगा। उसकी उम्र उस समय सिर्फ पांच साल की थी, मगर उसमें असाधारण समझदारी थी।

नचिकेता ने अपने पिता को समझाना चाहा
नचिकेता ने अपने पिता से कहा, ‘आपने ठीक नहीं किया। अगर आप सब कुछ देना नहीं चाहते थे, तो आपको यह शपथ नहीं लेनी चाहिए थी। एक बार शपथ लेने के बाद, आपको सब कुछ दे देना चाहिए। मुझे बताइए कि आप मुझे किसको दान करने वाले हैं?’ उसके पिता क्रोधित हो गए और बोले, ‘मैं तुम्हें यम को देने वाला हूं।’ यम मृत्यु के देवता होते हैं। बालक ने अपने पिता की बात को बहुत गंभीरता से लिया और यम के पास जाने के लिए तैयार होने लगा। फिर वह यम के पास चला गया। यह मत सोचिए कि ‘वह कैसे गया होगा, शरीर के साथ या शरीर छोड़कर?’ मुद्दा यह नहीं है। बस वह यम के पास चला गया।

यम की प्रतीक्षा में नचिकेता ने बिताए तीन दिन
यम उस समय यमलोक में नहीं थे। वह घूमने गए हुए थे। उन्हें घर-घर जाना पड़ता है। तो वह घूमने गए हुए थे। नचिकेता पूरे तीन दिन तक इंतजार करता रहा। एक छोटा सा बालक भोजन-पानी के बिना यम के द्वार पर इंतजार करता रहा। तीन दिन बाद यम लौटे तो उन्होंने पूरी तरह थके और भूखे, मगर पक्के इरादे वाले इस छोटे से बालक को देखा। वह बिना हिले-डुले वहां बैठा हुआ था। वह भोजन की तलाश में इधर-उधर भी नहीं गया था। वह बस वहां बैठकर यम की प्रतीक्षा कर रहा था। यम इस बालक के पक्के इरादे से बहुत प्रभावित हुए, जो तीन दिन से प्रतीक्षा कर रहा था, वह भी बिना कुछ ग्रहण किए। वह बोले, ‘मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लगा कि तुम तीन दिन से मेरा इंतजार कर रहे हो। तुम्हें क्या चाहिए? मैं तुम्हें तीन वरदान देता हूं। बताओ, तुम क्या चाहते हो?’

नचिकेता ने पूछा मृत्यु के रहस्य के बारे में
नचिकेता ने सबसे पहले कहा, ‘मेरे पिता बहुत लालची हैं। वह सांसारिक सुख-सुविधाएं चाहते हैं। इसलिए आप उन्हें सारे भौतिक ऐशोआराम का आशीर्वाद दें। उन्हें राजा बना दीजिए।’ यम ने कहा ‘तथास्तु’। उसने दूसरा वरदान मांगा, ‘मैं जानना चाहता हूं कि मुझे ज्ञान प्राप्त करने के लिए किस तरह के कर्मों और यज्ञों को करने की जरूरत है।’ वैदिक साहित्य में हमेशा यज्ञों की बात की जाती है। सारा वैदिक साहित्य ऐसा ही है – यज्ञों के बारे में। यम ने उसे सिखाया कि उसे क्या करना चाहिए।
फिर नचिकेता ने उनसे पूछा, ‘मृत्यु का रहस्य क्या है? मृत्यु के बाद क्या होता है?’ यम ने कहा, ‘यह प्रश्न तुम वापस ले लो। तुम मुझसे और कुछ भी मांग लो। तुम चाहो तो मुझसे एक राज्य मांग लो, मैं तुम्हें दे दूंगा। मैं तुम्हें धन-दौलत दे सकता हूं। मैं तुम्हें दुनिया के सारे सुख दे सकता हूं।’ वह बोलते रहे, ‘तुम मुझे बताओ, क्या चाहते हो। तुम मुझसे दुनिया की सारी खुशियां ले लो, मगर यह प्रश्न मत पूछो।’ नचिकेता ने कहा, ‘इन सब का मैं क्या करूंगा? आप पहले ही मुझे बता चुके हैं कि ये सब चीजें नश्वर हैं। मैं पहले ही समझ चुका हूं कि सारे क्रियाकलाप, लोग जिन चीजों में सं लिप्त हैं, वे सब अर्थहीन हैं। वह सिर्फ दिखता है, वह हकीकत नहीं है। फिर मुझे और धन-दौलत देने का क्या लाभ? वह तो मेरे लिए सिर्फ एक जाल होगा। मैं कुछ नहीं चाहता, आप बस मेरे प्रश्न का उत्तर दीजिए।’

नचिकेता को हुई परम ज्ञान की प्राप्ति
यम ने इस सवाल को टालने की हर संभव कोशिश की। वह बोले, ‘देवता भी इस प्रश्न का उत्तर नहीं जानते। मैं तुम्हें नहीं बता सकता।’ नचिकेता ने कहा, ‘अगर ऐसा है, अगर देवता भी इसका उत्तर नहीं जानते और सिर्फ आप जानते हैं, तब तो आपको इसका उत्तर देना ही होगा।’
उसने अपनी जिद नहीं छोड़ी। यम एक बार फिर उसे वहीं छोड़कर महीनों के लिए घूमने चले गए। वह किसी तरह सिर्फ इस बालक से पीछा छुड़ाना चाहते थे। मगर बालक कई महीनों तक वहीं डटा रहा। कहा जाता है कि यम के द्वार पर ही उसे पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति हुई। उसे अस्तित्व के सारे प्रश्नों के जवाब मिल गए और उसने खुद को विलीन कर दिया। वह प्रथम जिज्ञासु था। इसलिए हमेशा उसे एक आदर्श की तरह प्रस्तुत किया जाता है। उस तरह का पक्का इरादा रखने वाला पांच साल का बालक, जो चॉकलेट या डिजनीलैंड की यात्रा जैसे लालच में नहीं पड़ा। वह सिर्फ ज्ञान चाहता था

ज्ञान पाने की प्रबल इच्छा का महत्व
इस तरह के व्यक्ति के लिए किसी तरह के मार्ग की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि मंजिल यहीं है, वेलंगिरि पहाड़ियों की चोटी पर नहीं है। जब मंजिल यहां नहीं होती, तब वह वेलंगिरि पहाड़ियों पर होती है और हमें धीरे-धीरे उन पर चढ़ना पड़ता है। जब आप नचिकेता की तरह होते हैं, तो आपको किसी मार्ग की जरूरत नहीं होती। सब कुछ यहीं मिल जाता है। कहीं जाने की जरूरत नहीं होती। यहां हम जो कुछ कर रहे हैं, इसका पूरा मकसद उस तीव्रता को पैदा करना है। इच्छा को इतना प्रबल और शक्तिशाली होना चाहिए कि ईश्वर आपसे दूर न रह सके और दिव्यता आपको नजरअंदाज न कर पाए। ऐसा नहीं है कि दिव्यता आपको नजरअंदाज करने की कोशिश करता है, मगर आपका मन और अहं लाखों अलग-अलग तरीकों से वास्तविकता पर पर्दा डाल कर उसे आपकी आंखों से ओझल करने की कोशिश करते हैं।

आपकी तीव्रता ही आपको रूपांतरित करती है
चाहे आप कर्म के पथ पर चलें या ज्ञान, क्रिया या भक्ति के पथ पर, आपकी तीव्रता ही आपको इन रास्तों पर आपको आगे बढ़ाती है, न कि खुद ये रास्ते। अगर तीव्रता न हो, तो कोई क्रिया कुछ नहीं कर सकती। जब तीव्रता इन क्रियाओं में आ जाती है, तो उनमें आपको एक अलग आयाम तक ले जाने की शक्ति होती है।
यानी यह क्रिया नहीं है जो आपको रूपांतरित करती है, बल्कि आपकी तीव्रता आपको रूपांतरित करती है। जब आपमें ये तीव्रता होती है, तो क्रिया एक जबरदस्त सहारा है जो उस तीव्रता को और बढ़ता है। क्रियाओं का सारा मकसद यही है। चाहे आप किसी भी मार्ग पर भी चलें, पथ का अनुसरण आपको कोई ज्ञान प्राप्त नहीं करा सकता, जब तक कि आपके अंदर वह तीव्रता न हो।

सौ फीसदी या बिल्कुल नहीं
अगर आप आधे दिल से किसी से प्रेम करते हैं, तो वह प्रेम नहीं है। प्रेम या तो सौ फीसदी होता है या बिल्कुल नहीं। अगर आपको लगता है कि आप किसी से 99 फीसदी प्रेम कर सकते हैं, तो आपने प्रेम को जाना ही नहीं है। किसी भी तरह के क्रियाकलाप पर यही बात लागू होती है। अगर आप कोई कार्य सौ फीसदी नहीं करते, तो उसका कोई मतलब नहीं है। उसका कोई अच्छा नतीजा नहीं निकलेगा।। ज्यादा से ज्यादा वह आपका पेट भर सकता है। जब तक कि आप कोई काम सौ फीसदी न करें, वह आपको रूपांतरित नहीं कर सकता। जब तक कि आपका प्रेम सौ फीसदी न हो, वह आपको रूपांतरित नहीं कर सकता। वह लेन-देन की तरह कुछ पाने का एक जरिया हो सकता है, मगर अस्तित्व के अर्थों में उसका कोई मूल्य नहीं है।

सद्‌गुरु जग्गी वासुदेव

साभार : https://hindi.speakingtree.in/

जय छठी मईया

आदिदेव नमस्तुभ्यं प्रसीदमम् भास्कर।
दिवाकर नमस्तुभ्यं प्रभाकर नमोऽस्तु ते।।
#छठ #महापर्व #Chhath

छठी मईया आपकी सारी मनोकामनाओं को पूर्ण करें …

विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं

आपको विश्वकर्मा पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं।

बौद्धपौर्णिमायाः शुभाशयाः

Source – BuddhaCharita by Aśvaghoṣa – 9.18

#buddha #vesak #buddhapurnima #meditation #bodhi #buddhaquotes #buddhas #buddhapainting #tinebuddha #buddhaart #buddhalove #lordbuddha #buddhism #buddhist #buddismquotes

Namokar – Mahavir Jayanti

णमो अरिहंताणं । णमो सिध्दाणं । णमो आयरियाणं ।
णमो उवज्झयाणं । णमो लोए सव्वसाहुणं ।
एसो पंच णम्मुकारो, सव्व पावप्पणासणो ।
मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं ॥

English translation:

I bow to the Arihantas (the perfect human beings), I bow to the Siddhhas (liberated souls), I bow to the Acharyas (masters and the heads of congregations), I bow to the Upadhyayas (spiritual teachers), I bow to all the Sadhus (spiritual practitioners) in the world. Worshiping all these five, destroys all sins and obstacles, among all that is auspicious, this mantra is the foremost.

नवकार (णमोकार) मंत्र का अर्थ)

अरिहंतो को नमस्कार
सिद्धो को नमस्कार
आचार्यों को नमस्कार
उपाध्यायों को नमस्कार
सर्व साधुओं को नमस्कार

ये पाँच परमेष्ठी हैं । इन पवित्र आत्माओं को शुद्ध भावपूर्वक किया गया यह पंच नमस्कार सब पापों का नाश करने वाला है।
संसार में सबसे उतम मंत्र है ।

Mahavir Jayanti is one of the most prominent festivals in Jainism. Celebrating the birth of Mahaveer, the twenty-fourth and last Tirthankara.

Ṇamōkāra mantra is the most significant mantra in Jainism. This is the first prayer recited by the Jains while meditating. The mantra is also variously referred to as the Pancha Namaskāra Mantra, Navakāra Mantra or Namaskāra Mantra. While reciting this mantra, the devotee bows with respect to the Panch Parameshti (the Supreme Five):

There is no mention of any particular names of the gods or any specific person. The prayer is done towards the guṇa (the good qualities) of the gods, teachers and the saints. Jains do not ask for any favors or material benefits from the tirthankaras or monastics. This mantra simply serves as a gesture of deep respect towards beings whom they believe are spiritually evolved, as well as to remind the people of their ultimate goal i.e. moksha (liberation).[4] Navkar Mantra consists of 35 letters.

Arihant— Those who have destroyed the four inimical karmas
Siddha — The liberated souls
Acharyas — The spiritual leaders or Preceptors
Upadhyaya — Preceptor of less advanced ascetics
Sādhu — The monks or sages in the world

There is no mention of any particular names of the gods or any specific person. Instead, the Namokar mantra focuses on the guṇa (the good qualities) of the gods, teachers and the saints. It can be noted that this mantra does not ask for any favors or material benefits from the Tirthankaras or monastics.

Namokar mantra simply serves as a gesture of deep respect towards beings whom they believe are spiritually evolved, as well as to remind the people of their ultimate goal i.e. moksha (liberation).

विद्या ददाति विनयं

विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।

पात्रत्वाद् धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥

Knowledge makes one humble, humility begets worthiness, worthiness creates enrichment, which leads to right conduct, right conduct brings contentment

Be The Best Version Of Yourself

Somewhere, Someone is Looking at You like you’re the Best Things in the World.
Stay The #BestVersion of Yourself.

#inspiringshashi #motivational #Inspire #हरहरमहादेव #goodmorning https://t.co/iGWAGXMei6

सर्वम शिवमयं

May all your wishes come true and the blessings of the God remain with you always.

Happy Maha Shivratri

कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।

सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे
भबं भवानीसहितं नमामि।।

महान वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन।

बुंदेले हरबोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी।

Happy Dussehra! Pledge to remove the Ravna for ourselves.

In ur life, may the good triumph over evil; and may you achieve the strength and courage to follow the path of righteousness!

Continue reading “Happy Dussehra! Pledge to remove the Ravna for ourselves.”

HAPPY GURUPURAB

सत श्री अकाल जी
अज गुरुपर्व दियां आप सब नु लख लख वधाईयां
बाबा नानक सब ते अपनी मेहर बरसावे
ते त्वाडे घर गुरुपर्व खुशियाँ लै के आवे जी ….

“HAPPY GURUPURAB.May guru bless you and your family with peace,joy and lots of happiness. Stay blessed.”

#Gurupurab #Nanak #Shashi #Jamshedpur

Happy Diwali To All My friends & Beloved.. 03 Nov 2013

I Pray to God to give U Shanti, Shakti, Sampati, Swarup, Saiyam, Saadgi, Safalta, Samridhi, Sanskar, Swaasth, Sanmaan, Saraswati, aur SNEH.
Happy Diwali

आपको दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ

Nippy autumn mornings, chanting of hymns, dulcet whiffs of incense sticks & echoes of mystic mantras.
………………………………………………………
May Maa Durga empower you and ur family
With her nine swaroopa of Name, Fame, Health, Wealth, Happiness, Humanity, Education, Bhakti & Shakti.

आपको सबको दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Happy Dasahra 10 Oct 2012

This Navratri, may you be blessed with good fortune as long as Ganeshji’s trunk, wealth and prosperity as big as his stomach, happiness as sweet as his ladoos and may your trouble be as small as his mouse.
Happy Navratri.
Rgds
Shashi

Maa Chandraghanta – Third form of Maa Durga Worshiped on 3rd Navratri

Maa Chandraghanta is the third Shakti of Maa Durga. Maa Chandraghanta is worshiped on the third day of Navrti Pooja. Those who worship Devi Chandraghanta get eternal strength and be blessed by Devi Maa to be happy through out one’s life.

Maa Chandraghanta – Third form of Maa Durga Worshiped on 3rd Navratri
Maa Chandraghanta is one Who establishes justice and wears crescent moon on Her head. Because of this bell shaped mark of moon which is present on the fore head of Maa Chandraghanta, Maa is known as Chandraghanta. The colour of her body is golden, she rides on lion who descrides “dharma”, possesses ten hands and three eyes, eight of Her hands display weapons while the remaining two are respectively in the mudras of gestures of boon giving and stopping harm. Devi Maa is posed as to be ready for war. “Chandra Ghanta”  meaning supreme bliss and knowledge, showering peace and serenity, like cool breeze in a moonlit night. By her blessings all the hindrances coming in way of a person are removed. Her pleasant looks clears all sorrows and sadness of her devotees. Her roaring voice alerts and makes the Demons to tremble.

In Durga Pooja the third day of Navratri is very important in Navaratri. This day the mind of the sadhak enters Manipura Cakra. At this stage by the grace of Maa Chandraghanta he becomes capable of seeing unearthly and divine things. He smells the divine fragrance and many types of divine sound become audible to him. On this day and in this stage of discipline the sadhak is required to be most careful.

By the grace of Mother Chandraghanta all sins of the sadhak (striver) are burnt up and obstacles removed. Her worship is instantly fruitful. She is always in a gesture as if ready to proceed for the battlefield and thus she removes the difficulties of devotees very promptly. Her vehicle is lion and so her worshiper becomes valorous and fearless like a lion. The sound of her bell always protects her devotees from evil spirits. As soon as the sadhak invokes her, her bell immediately becomes active and starts ringing to protect the devotee under her shelter.

Maa Chandraghanta is the third Shakti of Maa Durga. Maa Chandraghanta is worshiped on the third day of Navrti Pooja. Those who worship Devi Chandraghanta get eternal strength and be blessed by Devi Maa to be happy through out one’s life.

Maa Chandraghanta – Third form of Maa Durga Worshiped on 3rd Navratri
Maa Chandraghanta is one Who establishes justice and wears crescent moon on Her head. Because of this bell shaped mark of moon which is present on the fore head of Maa Chandraghanta, Maa is known as Chandraghanta. The colour of her body is golden, she rides on lion who descrides “dharma”, possesses ten hands and three eyes, eight of Her hands display weapons while the remaining two are respectively in the mudras of gestures of boon giving and stopping harm. Devi Maa is posed as to be ready for war. “Chandra Ghanta”  meaning supreme bliss and knowledge, showering peace and serenity, like cool breeze in a moonlit night. By her blessings all the hindrances coming in way of a person are removed. Her pleasant looks clears all sorrows and sadness of her devotees. Her roaring voice alerts and makes the Demons to tremble.

In Durga Pooja the third day of Navratri is very important in Navaratri. This day the mind of the sadhak enters Manipura Cakra. At this stage by the grace of Maa Chandraghanta he becomes capable of seeing unearthly and divine things. He smells the divine fragrance and many types of divine sound become audible to him. On this day and in this stage of discipline the sadhak is required to be most careful.

By the grace of Mother Chandraghanta all sins of the sadhak (striver) are burnt up and obstacles removed. Her worship is instantly fruitful. She is always in a gesture as if ready to proceed for the battlefield and thus she removes the difficulties of devotees very promptly. Her vehicle is lion and so her worshiper becomes valorous and fearless like a lion. The sound of her bell always protects her devotees from evil spirits. As soon as the sadhak invokes her, her bell immediately becomes active and starts ringing to protect the devotee under her shelter.